वन विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया पर उठे सवाल, पात्र कर्मचारियों ने सौंपा संयुक्त आवेदन..

Spread the love

वन विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया पर उठे सवाल, पात्र कर्मचारियों ने सौंपा संयुक्त आवेदन

2017 में नियुक्त कर्मचारियों को पदोन्नति देने और 2012, 2013 व 2016 के पात्र कर्मचारियों को वंचित रखने का आरोप; रिव्यू डीपीसी आयोजित कर न्याय दिलाने की मांग

दमोह। वन मंडल कार्यालय दमोह में हाल ही में संपन्न हुई विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है। वन मंडल के अंतर्गत पदस्थ कर्मचारियों ने पदोन्नति प्रक्रिया में कथित वैधानिक एवं प्रक्रियात्मक विसंगतियों का आरोप लगाते हुए मुख्य वन संरक्षक, वन वृत्त सागर के नाम संयुक्त आवेदन सौंपा है। यह आवेदन वन मंडल कार्यालय दमोह में उप वन मंडल अधिकारी को दिया गया। कर्मचारियों ने मांग की है कि पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए तथा नियमानुसार पात्र कर्मचारियों को वनरक्षक से वनपाल के पद पर पदोन्नति का लाभ दिया जाए।

कर्मचारियों का आरोप है कि हाल ही में हुई विभागीय पदोन्नति में वर्ष 2017 में नियुक्त कुछ कर्मचारियों को पदोन्नत कर दिया गया, जबकि उनसे पहले वर्ष 2012, 2013 और 2016 में नियुक्त ऐसे कर्मचारी, जो स्वयं को पदोन्नति के लिए पात्र बता रहे हैं, उन्हें इस लाभ से वंचित रखा गया। आवेदन में इस स्थिति को नियमों और पात्रता संबंधी शर्तों के विपरीत बताते हुए विभागीय स्तर पर पुनर्विचार की मांग की गई है।

12 वर्ष की अर्हकारी सेवा को लेकर उठाया सवाल

संयुक्त आवेदन में कर्मचारियों ने दावा किया है कि वनपाल पद पर पदोन्नति के लिए 12 वर्ष की वास्तविक अर्हकारी सेवा आवश्यक है। उनका कहना है कि वर्ष 2017 में नियुक्त कर्मचारियों की सेवा अवधि लगभग नौ वर्ष होने के बावजूद उन्हें पदोन्नति दे दी गई, जबकि उनसे पहले नियुक्त कर्मचारियों के मामलों में समान रूप से विचार नहीं किया गया।

कर्मचारियों का तर्क है कि यदि पदोन्नति के लिए निर्धारित नियमों में संबंधित पद पर निश्चित अवधि की नियमित सेवा अनिवार्य है, तो पात्रता का निर्धारण वास्तविक सेवा और लागू नियमों के अनुसार होना चाहिए। केवल वरिष्ठता के आधार पर किसी कर्मचारी को ऐसा लाभ नहीं दिया जा सकता, जिससे अनिवार्य अर्हकारी सेवा की शर्त प्रभावित हो।

हालांकि, इस मामले में 12 वर्ष की सेवा संबंधी शर्त किस विशिष्ट भर्ती या पदोन्नति नियम के अंतर्गत लागू होती है, संबंधित पदोन्नति आदेश में किन प्रावधानों का उल्लेख है और पदोन्नत कर्मचारियों को किस आधार पर पात्र माना गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का दिया हवाला

आवेदन में कर्मचारियों ने माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पदोन्नति, वरिष्ठता और अर्हकारी सेवा से जुड़े मामलों में प्रतिपादित कानूनी सिद्धांतों का हवाला दिया है। उनका कहना है कि जहां लागू सेवा नियम किसी पद पर निश्चित अवधि की वास्तविक या नियमित अर्हकारी सेवा की शर्त निर्धारित करते हैं, वहां केवल काल्पनिक अथवा पूर्वव्यापी वरिष्ठता के आधार पर उस सेवा अवधि को स्वतः पूरा नहीं माना जा सकता।

कर्मचारियों ने इसी आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा करने और पात्रता की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है। हालांकि, आवेदन में सुप्रीम कोर्ट के किसी विशिष्ट निर्णय का नाम, प्रकरण क्रमांक अथवा निर्णय की तारीख उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसलिए इस मामले में किसी विशेष न्यायिक फैसले को सीधे लागू मानने से पहले संबंधित निर्णय और विभागीय पदोन्नति नियमों का सत्यापन आवश्यक होगा।

रिव्यू डीपीसी कर पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति देने की मांग

संयुक्त आवेदन के माध्यम से कर्मचारियों ने मांग की है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 की कथित कंडिका 21 के अंतर्गत पुनर्विलोकन विभागीय पदोन्नति समिति (रिव्यू डीपीसी) आयोजित की जाए। इसके जरिए पूर्व में हुई पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा कर वास्तविक पात्रता, अर्हकारी सेवा और लागू वरिष्ठता नियमों के आधार पर निर्णय लिया जाए।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें हैं कि—

  • पदोन्नति प्रक्रिया में अपनाए गए पात्रता संबंधी मानदंडों की जांच की जाए।
  • यदि किसी कर्मचारी की पदोन्नति निर्धारित नियमों के विपरीत पाई जाती है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।
  • पात्र कर्मचारियों के मामलों पर पुनर्विचार के लिए रिव्यू डीपीसी आयोजित की जाए।
  • वनरक्षक से वनपाल पद पर पदोन्नति में वास्तविक अर्हकारी सेवा और लागू सेवा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि निर्धारित अर्हकारी सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित रखा गया है, तो उनके मामलों में निष्पक्षता के साथ पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

शिवपुरी वन वृत्त की कार्रवाई का दिया उदाहरण

अपने आवेदन में कर्मचारियों ने शिवपुरी वन वृत्त में हुई एक कार्रवाई का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, वहां जुलाई 2026 में पदोन्नत किए गए कुछ कर्मचारियों की पदोन्नति आदेश क्रमांक 205, दिनांक 24 सितंबर 2026 के माध्यम से तत्काल प्रभाव से निरस्त की गई तथा संबंधित कर्मचारियों को उनके मूल पद वनरक्षक पर प्रत्यावर्तित किया गया।

दमोह के कर्मचारियों ने इस कार्रवाई का उदाहरण देते हुए मांग की है कि यदि दमोह मंडल में भी पदोन्नति के दौरान पात्रता संबंधी नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो यहां भी मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

हालांकि, शिवपुरी के उक्त आदेश की प्रमाणित प्रति और उसमें पदोन्नति निरस्त करने के दर्ज कारण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए उस कार्रवाई को दमोह के मामले में स्वतः लागू होने वाला निर्णय नहीं माना जा सकता। दोनों मामलों में संबंधित सेवा नियमों, पदोन्नति आदेशों और कर्मचारियों की व्यक्तिगत पात्रता की तुलना आवश्यक होगी।

विभागीय निर्णय पर टिकी कर्मचारियों की निगाहें

वन मंडल दमोह में पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उठे इन सवालों के बाद अब कर्मचारियों की निगाहें मुख्य वन संरक्षक, वन वृत्त सागर और संबंधित विभागीय अधिकारियों के निर्णय पर टिकी हैं। कर्मचारी चाहते हैं कि उनके आवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई हो और पदोन्नति के मामले में सभी पात्र कर्मचारियों को समान अवसर मिले।

फिलहाल संयुक्त आवेदन में लगाए गए आरोपों और मांगों पर विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। यह भी स्पष्ट होना शेष है कि विभाग पदोन्नति प्रक्रिया की जांच कराएगा, रिव्यू डीपीसी आयोजित करेगा या मौजूदा आदेशों को नियमों के आधार पर सही पाएगा। विभागीय पक्ष और संबंधित आदेशों की पुष्टि के बाद मामले की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

About The Author