रिश्वतखोर सहायक यंत्री को 4 साल का सश्रम कारावास
70-80 लाख के निर्माण कार्यों के बिल पास कराने के एवज में मांगी थी 50 हजार की रिश्वत, लोकायुक्त ने रंगे हाथ पकड़ा था
दमोह। निर्माण कार्यों के बिलों के भुगतान की अनुशंसा करने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने वाले तत्कालीन प्रभारी सहायक यंत्री को विशेष न्यायालय ने दोषी करार देते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, दमोह श्री संतोष कुमार गुप्ता ने बुधवार 30 सितंबर 2026 को पारित निर्णय में तत्कालीन प्रभारी सहायक यंत्री, जनपद पंचायत दमोह गोविंद दास अहिरवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 तथा धारा 13(1)(b) सहपठित धारा 13(2) के तहत दोषसिद्ध किया।
70-80 लाख के बिलों के भुगतान के एवज में मांगी रिश्वत
मामला वर्ष 2021 का है। फरियादी लीलेन्द्र सिंह लोधी ने 13 अक्टूबर 2021 को लोकायुक्त पुलिस सागर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनकी माता मूंगाबाई, जो उस समय ग्राम पंचायत बालाकोट की सरपंच थीं, के कार्यकाल में मनरेगा योजना के तहत नवीन तालाब, खकरी निर्माण, वृक्षारोपण सहित विभिन्न निर्माण कार्य कराए गए थे।
इन कार्यों से संबंधित करीब 70 से 80 लाख रुपये के देयकों एवं बिलों के भुगतान की अनुशंसा करने के एवज में तत्कालीन प्रभारी सहायक यंत्री गोविंद दास अहिरवार द्वारा कथित रूप से 5 प्रतिशत के हिसाब से 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही थी।
जनपद पंचायत परिसर में 50 हजार लेते रंगे हाथ पकड़ा
शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई की योजना बनाई। 1 नवंबर 2021 को ट्रैप कार्रवाई के दौरान आरोपी गोविंद दास अहिरवार को जनपद पंचायत दमोह कार्यालय परिसर में 50 हजार रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया।
कार्रवाई के दौरान आरोपी की पेंट की दाहिनी जेब से रिश्वत की रकम बरामद की गई। इसके अलावा हाथ और कपड़ों की धुलाई के दौरान किए गए रासायनिक परीक्षण में घोल का रंग गुलाबी पाया गया, जिसे अभियोजन ने मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया।
FSL और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी बने आधार
मामले की विवेचना के दौरान भौतिक एवं मौखिक साक्ष्यों के साथ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तथा FSL की रासायनिक और ध्वनि परीक्षण रिपोर्ट भी संकलित की गई। इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से यह बचाव लेने का प्रयास किया गया कि घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं था। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने अपने बचाव में ‘अन्यत्र उपस्थिति’ यानी Plea of Alibi का दावा किया था। हालांकि न्यायालय ने पंचसाक्षियों की गवाही, नक्शा-मौका, रंगे हाथों जब्ती और केमिकल परीक्षण सहित प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी के इस दावे को स्वीकार नहीं किया।
अभियोजन के तर्कों से सहमत हुआ न्यायालय
मामले में प्रस्तुत दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्यों तथा अभियोजन द्वारा रखे गए तर्कों से सहमत होते हुए विशेष न्यायालय ने आरोपी गोविंद दास अहिरवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना और चार वर्ष के सश्रम कारावास तथा 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
मामले में अभियोजन की ओर से प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन धर्मेन्द्र सिंह तारन के निर्देशन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी संजय कुमार रावत ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष को विनय नामदेव ने आवश्यक सहयोग प्रदान किया।


More Stories
“सांदीपनि विद्यालयों की देरी पर 3.68 करोड़ की शास्ति, दिसंबर तक हैंडओवर नहीं तो ब्लैकलिस्ट होगी एजेंसी”
दमोह में गूंजा सनातन एकता का संदेश, 1000 युवाओं ने ली त्रिशूल दीक्षा..
SIR और मतदाता सूची के मुद्दे पर दमोह में कांग्रेस का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंका..