सांदीपनि विद्यालयों में देरी पर 3.68 करोड़ की शास्ति, दिसंबर तक पूर्ण करने का अल्टीमेटम..
तेंदूखेड़ा में निजी भूमि पर SDM कार्यालय निर्माण का मामला, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश..
दमोह। जिले में निर्माणाधीन सांदीपनि विद्यालयों की धीमी प्रगति और निर्माण गुणवत्ता को लेकर कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की मंशा शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर और आधुनिक परिसर उपलब्ध कराने की है, लेकिन निर्माण कार्यों में देरी और लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
कलेक्टर ने जिले के निर्माणाधीन सांदीपनि विद्यालयों का निरीक्षण कर प्रगति, गुणवत्ता और सामने आई अनियमितताओं की समीक्षा की। जिले में स्वीकृत छह सांदीपनि विद्यालय वर्ष 2025 में पूर्ण किए जाने थे, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी निर्माण कार्य पूरे नहीं हो सके हैं। इस पर संबंधित निर्माण एजेंसी PIU के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 3 करोड़ 68 लाख 18 हजार रुपये की शास्ति आरोपित की गई है।
कलेक्टर ने सभी छह सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण दिसंबर 2026 तक पूर्ण कर विभाग को हैंडओवर करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि तय समयसीमा में कार्य पूरा नहीं होने पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।
निर्माण गुणवत्ता की होगी जांच..
निरीक्षण के दौरान निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी कमियां सामने आईं। कलेक्टर ने तकनीकी टीम भेजकर निर्माण कार्य की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। निर्माण सामग्री के सैंपल PWD के कार्यपालन यंत्री को दिए गए हैं। इन सैंपलों को बिना पूर्व सूचना के अन्य लैब में भेजकर गुणवत्ता परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निजी भूमि पर SDM कार्यालय निर्माण से मचा हड़कंप..
तेंदूखेड़ा में करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत SDM कार्यालय भवन के निरीक्षण के दौरान गंभीर मामला सामने आया। भवन का निर्माण निजी भूमि पर किया जा रहा था। कलेक्टर ने इसे नियमों की अनदेखी मानते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
मामले में EE, PIU, SDO और सब-इंजीनियर सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए विभाग प्रमुख को पत्र लिखा गया है। कलेक्टर ने कहा कि शासकीय राशि से शासकीय भवन का निर्माण केवल निर्धारित शासकीय भूमि पर ही किया जाना चाहिए। निर्माण से पहले NOC, खसरा-नक्शा और भूमि संबंधी सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी थी।
सरकारी राशि से निजी भूमि पर निर्माण स्वीकार नहीं..
कलेक्टर यादव ने स्पष्ट किया कि शासकीय भवन निर्माण के लिए स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित शासकीय भूमि पर ही किया जाए। निजी भूमि पर निर्माण क्यों और कैसे हुआ, इसकी जिम्मेदारी तय कर संबंधित से वसूली की कार्रवाई PIU को करनी होगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि निर्धारित शासकीय भूमि पर SDM कार्यालय भवन का निर्माण पूर्ण कर उपलब्ध कराया जाए। साथ ही प्रकरण में हुई क्षति अथवा संभावित वित्तीय नुकसान की जिम्मेदारी तय कर वसूली की कार्रवाई की जाए। कलेक्टर ने कहा कि निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय होगी और सरकारी धन के दुरुपयोग अथवा नियमों की अनदेखी को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।


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