कुसमी मानगढ़ में आदिवासी जमीन का मुद्दा गरमाया, कांग्रेस ने SDM को सौंपा ज्ञापन
जबेरा में कांग्रेस का प्रदर्शन, प्रभावित आदिवासी परिवारों के जमीन संबंधी अधिकारों की सुरक्षा की उठाई मांग
दमोह। जबेरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कुसमी मानगढ़ में अनुसूचित जनजाति के परिवारों की जमीन कथित तौर पर एक संस्था को सौंपे जाने का मामला गरमा गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रभावित आदिवासी परिवारों के जमीन संबंधी अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। बुधवार, 14 अक्टूबर को कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जबेरा स्थित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय पहुंचकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने मामले को आदिवासी परिवारों के जमीन संबंधी अधिकारों और हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की। उनका कहना था कि जमीन के संबंध में सामने आए प्रकरण की गंभीरता से जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रभावित परिवारों के अधिकारों का किसी भी स्थिति में उल्लंघन न हो।
ग्रामीणों ने भी जताई चिंता
कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में ग्राम कुसमी मानगढ़ के ग्रामीण भी शामिल हुए। ग्रामीणों ने जमीन से जुड़े मामले पर अपनी चिंता जाहिर की। कांग्रेस पदाधिकारियों ने प्रशासन के समक्ष मांग रखी कि पूरे प्रकरण के तथ्यों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही, यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जबेरा विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 56 के प्रभारी उमाकांत यादव, जिला कांग्रेस कमेटी महामंत्री नितिन मिश्रा, जिला कांग्रेस कमेटी सदस्य अखिलेश सोनी, जिला पंचायत सदस्य रजनी ठाकुर, राजा खान, जबेरा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा, राजा सिंह लोधी, विधानसभा सोशल मीडिया प्रभारी नीलेश ठाकुर, सचिन तिवारी और जबेरा ब्लॉक युवक कांग्रेस अध्यक्ष धन सिंह ठाकुर सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की कि कुसमी मानगढ़ के जमीन संबंधी प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर प्रभावित आदिवासी परिवारों के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। अब इस मामले में प्रशासनिक जांच और अधिकारियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी। हालांकि, जमीन किस प्रक्रिया के तहत संस्था को सौंपे जाने का आरोप है और इस संबंध में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष क्या है, यह स्पष्ट होना बाकी है।


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