पहले वीडियो पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप, अब सफाई ठेका कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग..

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जिला अस्पताल में मरीजों के परिजनों से सफाई कराने का मामला फिर गरमाया, कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन

पहले वीडियो पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप, अब सफाई ठेका कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

दमोह। जिला चिकित्सालय दमोह में मरीजों के परिजनों से सफाई कराए जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अस्पताल में इलाज कराने पहुंची महिला से सफाई कराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब मरीजों के परिजनों से सफाई कराए जाने का एक और मामला सामने आने का हवाला देते हुए कांग्रेस ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को ज्ञापन सौंपकर दोषियों और सफाई का ठेका लेने वाली कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

पहले मामले में कार्रवाई नहीं होने का आरोप

कांग्रेस द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि कुछ समय पहले जिला चिकित्सालय में अपने बेटे का इलाज कराने पहुंची एक महिला से सफाई कराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आया था। इस घटना को लेकर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे और प्रशासन की ओर से जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उक्त मामले में आज तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

ज्ञापन में कहा गया कि पुराने मामले के बाद एक बार फिर मरीजों के परिजनों से सफाई कराए जाने का वीडियो सामने आया है। इससे जिला चिकित्सालय की सफाई व्यवस्था और संबंधित जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस ने इसे गंभीर और निंदनीय बताते हुए कहा कि अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों को उपचार के दौरान अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना चाहिए।

लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी सफाई व्यवस्था पर सवाल

कांग्रेस ने ज्ञापन में कहा कि जिला चिकित्सालय में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिमाह लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद यदि मरीजों के परिजनों से सफाई कराई जा रही है, तो यह व्यवस्था की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता को दर्शाता है।

ज्ञापन में सफाई कार्य का ठेका लेने वाली कंपनी अथवा संस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि संबंधित कंपनी के पास आवश्यक वैधानिक दस्तावेजों की कमी होने की चर्चा है, इसके बावजूद उसे सफाई का कार्य सौंपे जाने की बात सामने आ रही है। साथ ही सफाई कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन नहीं मिलने और ठेका शर्तों का पालन नहीं किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

इन आरोपों के मद्देनजर कांग्रेस ने संबंधित कंपनी के दस्तावेजों, ठेका प्रक्रिया, कर्मचारियों के वेतन भुगतान और सफाई व्यवस्था पर होने वाले खर्च की जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि सफाई कार्य की निगरानी और संचालन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन शिकायतें और मामले सामने आने के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई और व्यवस्था सुधारने की मांग

कांग्रेस ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मरीजों के परिजनों से सफाई कराए जाने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही सफाई ठेका कंपनी की पात्रता, वैधानिक दस्तावेजों और अनुबंध की शर्तों की जांच कराए जाने पर जोर दिया।

कांग्रेस का कहना है कि जिला चिकित्सालय में मरीज उपचार कराने के लिए आते हैं। ऐसे में अस्पताल की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारियों और ठेका एजेंसी की होनी चाहिए। मरीजों और उनके परिजनों से सफाई कराए जाने की शिकायतें सामने आना अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए केवल आश्वासन देने के बजाय मामले में जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं की रही उपस्थिति

ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला महासचिव नितिन मिश्रा, मनु मिश्रा, रजनी ठाकुर, लालचंद राय, दृगपाल सिंह, अमर सिंह, वीरेंद्र ठाकुर, रोहन पाठक, अजय जाटव, केके अग्रवाल, गौरव राय, धर्मेंद्र राय, डीपी पटेल, मिक्की चंदेल, मदन सुमन, पप्पू कसौटिया, खिल्लू ठाकुर, रवि अहिरवार, एके चिश्ती, उबैद गौरी, दिनेश रैकवार, अमित नामदेव, नीलेश यादव और वकील कुरैशी सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर हैं। मामले में सफाई ठेका कंपनी की पात्रता, कर्मचारियों के वेतन भुगतान, अस्पताल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था और वायरल वीडियो से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

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