एकलव्य विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह गरिमामय माहौल में संपन्न..
ज्ञान से शक्ति और संस्कार से दिशा मिले, शिक्षा का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण : कुलाधिपति डॉ. सुधा मलैया..
दमोह। एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह का प्रथम दीक्षांत समारोह सोमवार, 5 अक्टूबर को विश्वविद्यालय परिसर में भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों के 233 शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही शैक्षणिक उत्कृष्टता के आधार पर विद्यार्थियों को स्वर्ण एवं रजत पदकों से सम्मानित किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व वित्त मंत्री एवं दमोह विधायक जयंत मलैया, मुख्य संरक्षक राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेंद्र सिंह लोधी, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभापति प्रो. खेम सिंह डेहरिया सहित कुलाधिपति डॉ. सुधा मलैया, प्रति कुलाधिपति श्रीमती पूजा मलैया, श्रीमती रति मलैया, आरुष जी महाराज, विवेक शैंडेय, कुलगुरु प्रो. डॉ. पवन कुमार जैन, कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल शर्मा सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
समारोह का शुभारंभ शैक्षणिक शोभायात्रा से हुआ। इसके बाद राष्ट्रगीत वंदेमातरम् से सभागार गुंजायमान हुआ। अतिथियों का स्वागत साल, श्रीफल, तुलसी का पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। कुलगुरु प्रो. पवन कुमार जैन ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में 134 शैक्षणिक विधाओं में डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
‘शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व जरूरी’..
कुलाधिपति डॉ. सुधा मलैया ने अपने संबोधन में प्रथम दीक्षांत समारोह को विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की परिकल्पना ऐसे संस्थान के रूप में की गई है, जहां ज्ञान के साथ संस्कार, शिक्षा के साथ कौशल और प्रतिभा के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को प्रायोगिक एवं व्यावहारिक ज्ञान भी मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के विकास में करने के लिए प्रेरित करेगा।
दो विभूतियों को मानद पीएचडी..
समारोह में राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण योगदान के लिए मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज एवं ब्रह्मचारी संदीप सरल को मानद पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इसके अलावा विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर पदक एवं उपाधियां प्रदान की गईं।
विज्ञान संकाय में श्री विजय कुमार मलैया सर्वश्रेष्ठ स्वर्ण पदक सुश्री मोनिका ठाकुर को, कला संकाय में श्री जयंत कुमार मलैया सर्वश्रेष्ठ स्वर्ण पदक श्री नानगा राम को प्रदान किया गया। सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए डॉ. सुधा मलैया बहुमुखी उत्कृष्टता रनिंग शील्ड श्री सतेंद्र यादव तथा कुलाधिपति स्वर्ण पदक सुश्री सुप्रिया कुमारी को प्रदान किया गया। इसके साथ ही संकायवार अकादमिक उत्कृष्टता के आधार पर स्वर्ण एवं रजत पदक भी दिए गए।
233 शोधार्थियों और विद्यार्थियों को मिली उपाधियां..
दीक्षांत समारोह में विभिन्न विषयों में पीएचडी, स्नातकोत्तर एवं स्नातक के 233 शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। अनुपस्थित उपाधि प्राप्तकर्ताओं को भी उपाधि प्रदान किए जाने की घोषणा की गई।
समारोह को संबोधित करते हुए विवेक शैंडेय ने राष्ट्र को केंद्र में रखकर शोध कार्य को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। प्रो. खेम सिंह डेहरिया ने सत्य, प्रेम और करुणा को जीवन में अपनाने तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर नवाचार की बात कही।
आरुष जी महाराज ने कहा कि भारतीय परंपरा में ‘शिक्षांत’ नहीं बल्कि ‘दीक्षांत’ होता है, जो शिक्षा के साथ संस्कृति और संस्कारों से जुड़े होने का प्रतीक है। राज्य मंत्री लखन पटेल ने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए ज्ञान के प्रसार का आह्वान किया। धर्मेंद्र सिंह लोधी ने भारतीय संस्कृति की अक्षुण्णता बनाए रखने पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि जयंत मलैया ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए शिक्षा के साथ संस्कारों को भारतीय समाज की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह व्यक्ति और समाज के विकास में उपयोगी बने।
कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल शर्मा ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कुलाधिपति डॉ. सुधा मलैया ने समारोह के समापन की घोषणा की, जिसके बाद सभी ने सामूहिक राष्ट्रगान किया। कार्यक्रम का संचालन लेफ्टिनेंट डॉ. हृदय नारायण तिवारी ने किया। समारोह में विभिन्न राज्यों से आए उपाधि प्राप्तकर्ताओं, अभिभावकों, विश्वविद्यालय के संकाय प्रमुखों, विभागाध्यक्षों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।


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