आरईएस कार्यालय में कर्मचारी से मारपीट, ठेकेदार से जुड़े व्यक्ति पर आरोप; कर्मचारियों ने की एफआईआर की मांग
दमोह। जिले के ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) कार्यालय में शुक्रवार को एक कर्मचारी के साथ मारपीट की घटना सामने आने के बाद विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों में आक्रोश का माहौल है। घटना के बाद कर्मचारियों ने एकजुट होकर मामले की शिकायत दमोह कोतवाली पुलिस से की तथा आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरईएस कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी राजीव लोचन चौबे अपने कक्ष में नियमित कार्यालयीन कार्य कर रहे थे। इसी दौरान अमरदीप अग्रवाल नामक व्यक्ति कार्यालय पहुंचा और कथित रूप से अभद्र व्यवहार करते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर उसने कर्मचारी के साथ मारपीट भी की। घटना के समय कार्यालय में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।
पीड़ित कर्मचारी ने दर्ज कराई शिकायत…
पीड़ित कर्मचारी राजीव लोचन चौबे का कहना है कि अमरदीप अग्रवाल का उनके पास कोई लंबित कार्य नहीं था, इसके बावजूद वह कार्यालय में आकर विवाद करने लगा और मारपीट कर दी। घटना के बाद उन्होंने दमोह सिटी कोतवाली में आरोपी के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अधिकारी-कर्मचारी आए समर्थन में..
घटना की जानकारी मिलते ही आरईएस कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी एकजुट हो गए। उनका कहना है कि सरकारी कार्यालय के भीतर किसी कर्मचारी के साथ इस तरह की घटना न केवल चिंताजनक है, बल्कि इससे कार्यालयीन व्यवस्था और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।
आरईएस की कार्यपालन यंत्री अदिति सिंह (या अदिति ठाकुर, उपलब्ध जानकारी के अनुसार) ने बताया कि कर्मचारी द्वारा घटना की सूचना दी गई है तथा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को लेकर स्टाफ से चर्चा की जा रही है और आवश्यक विभागीय कदम उठाए जाएंगे।
पहले भी लग चुके हैं आरोप..
कार्यालय में पदस्थ चपरासी श्यामसुंदर तिवारी ने दावा किया कि इससे पहले भी उनके साथ अमरदीप अग्रवाल द्वारा मारपीट की घटना हो चुकी है। उस समय कर्मचारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया था और कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी।
कार्यालय में लंबे समय से सक्रिय रहने की चर्चा..
विभागीय सूत्रों के अनुसार अमरदीप अग्रवाल पिछले कई वर्षों से आरईएस कार्यालय में सक्रिय रूप से आता-जाता रहा है। सूत्रों का दावा है कि वह विभिन्न निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों के बीच मध्यस्थ (मेडिएटर) की भूमिका निभाता रहा है। पूर्व में पदस्थ अधिकारियों के कार्यकाल में भी उसे अक्सर कार्यालय और अधिकारियों के कक्षों के आसपास देखा जाता था।
कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि मनरेगा सहित अन्य कार्यों में मजदूरों और मस्टर रोल संबंधी व्यवस्थाओं में उसकी भूमिका रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
पंजीकरण और अधिकारिक भूमिका पर सवाल..
घटना के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि अमरदीप अग्रवाल की विभाग में आधिकारिक हैसियत क्या है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह विभाग में पंजीकृत ठेकेदार, वेंडर या किसी अधिकृत एजेंसी का प्रतिनिधि है अथवा नहीं। इस संबंध में विभागीय स्तर पर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पुलिस जांच के बाद होगा खुलासा..
दूसरी ओर कुछ सूत्र इस विवाद के पीछे पुराने लेन-देन अथवा अन्य व्यक्तिगत कारणों की भी चर्चा कर रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में मामले की वास्तविक वजह और घटनाक्रम का स्पष्ट खुलासा पुलिस जांच और दोनों पक्षों के बयानों के बाद ही हो सकेगा।
फिलहाल घटना ने सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था, बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारी संगठन भी आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।



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