गेट पर गुटखा चेकिंग और जुर्माना, फिर अस्पताल की दीवारों पर थूक के निशान क्यों?..

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जिला अस्पताल में बढ़े बेड, लेकिन स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल; गुटखा-थूकने से दीवारें खराब

गेट पर गुटखा चेकिंग और जुर्माना, फिर अस्पताल की दीवारों पर थूक के निशान क्यों?

300 से 450 हुए बेड, मरीज बढ़े तो संक्रमण का खतरा भी बढ़ा; जिला अस्पताल की स्वच्छता पर सवाल

दमोह। मौसम में बदलाव के साथ वायरल फीवर और विभिन्न संक्रमणों के मामले बढ़ने के बीच जिला अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए बेड क्षमता बढ़ाई गई है, लेकिन इसके साथ ही परिसर की स्वच्छता, गुटखा-तंबाकू के सेवन और संक्रमण नियंत्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल की दीवारों पर जगह-जगह गुटखा खाकर थूकने के निशान और परिसर में दिखाई देने वाली गंदगी अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

जिला अस्पताल में जिलेभर से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। मौसमी बीमारियों के कारण इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल के वार्डों पर भी दबाव बढ़ा है। ऐसी स्थिति में स्वच्छ वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है, क्योंकि अस्पताल में पहले से बीमार और संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के साथ उनके परिजन भी बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं।

300 से बढ़ाकर 450 बेड की गई क्षमता..

जिला अस्पताल की बढ़ती जरूरतों को लेकर सीएमएचओ डॉ. राकेश राय ने बताया कि अस्पताल में पहले 300 बेड की व्यवस्था थी, जिसे बढ़ाकर 450 बेड किया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की व्यवस्थाओं पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है।
हालांकि, बेड की संख्या बढ़ने के साथ मरीजों और उनके परिजनों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। ऐसे में अस्पताल के वार्डों के साथ-साथ शौचालय, गलियारे, सीढ़ियां, परिसर और सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई को लेकर भी अतिरिक्त निगरानी की जरूरत महसूस हो रही है।

गेट पर गुटखा चेकिंग, फिर अंदर कैसे पहुंच रहे पाउच?

जिला अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर गुटखा और तंबाकू लेकर आने वालों की जांच किए जाने तथा नियम तोड़ने वालों से जुर्माना वसूले जाने की बात सामने आती रही है। अस्पताल में जगह-जगह तंबाकू और गुटखा सेवन पर प्रतिबंध संबंधी चेतावनी भी लगाई गई है।

इसके बावजूद अस्पताल की दीवारों पर गुटखे के निशान दिखाई देना व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़ा करता है। यदि प्रवेश द्वार पर प्रतिबंधित सामग्री की जांच की जा रही है, तो फिर परिसर के भीतर गुटखा पहुंचने और उसका सेवन कर दीवारों पर थूकने की घटनाएं कैसे हो रही हैं, यह बड़ा सवाल है।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि केवल मुख्य गेट पर जांच और जुर्माना लगाने से व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं होगी। अस्पताल के अंदर भी नियमित निगरानी और नियमों का पालन कराने की जरूरत है।

सफाई कर्मचारियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल..

अस्पताल परिसर में गंदगी को लेकर मरीजों के परिजनों ने सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। मरीज के परिजन राजा रजक का कहना है कि अस्पताल में गुटखा-तंबाकू के सेवन पर रोक है और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की बात कही जाती है, लेकिन इसके बावजूद दीवारों पर थूकने के निशान दिखाई देते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार सफाई व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के भी गुटखा खाते हुए दिखाई देने की बात सामने आती है। यदि ऐसा है तो अस्पताल प्रबंधन को कर्मचारियों के लिए भी स्पष्ट नियम और निगरानी व्यवस्था लागू करनी चाहिए, क्योंकि मरीजों के बीच काम करने वाले कर्मचारियों से स्वच्छता संबंधी नियमों के पालन की अपेक्षा और अधिक होती है।

एक बेड पर दो-तीन मरीजों की स्थिति से संक्रमण का खतरा..

मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण कुछ वार्डों में एक बेड पर एक से अधिक मरीजों के उपचार की स्थिति भी सामने आ रही है। परिजनों का कहना है कि कहीं-कहीं एक बेड पर दो तो कहीं तीन मरीजों को रखने जैसी स्थिति दिखाई देती है।

हालांकि सीएमएचओ के अनुसार अस्पताल की बेड क्षमता बढ़ाकर 450 की गई है और व्यवस्थाओं पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। इसके बावजूद यदि मरीजों की संख्या उपलब्ध क्षमता से अधिक हो रही है तो अस्पताल प्रबंधन के सामने भीड़ प्रबंधन और संक्रमण नियंत्रण बड़ी चुनौती बन जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अस्पताल जैसे स्थान पर स्वच्छता, हाथों की स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, सतहों की नियमित सफाई और मरीजों के बीच पर्याप्त दूरी संक्रमण नियंत्रण के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए अस्पताल में बढ़ी हुई बेड क्षमता के साथ सफाई और संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्थाओं को भी उसी अनुपात में मजबूत करना जरूरी है।

केवल दीवारों की सफाई नहीं, निगरानी भी जरूरी..

अस्पताल में गुटखे के निशान साफ करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि दोबारा लोग वहां थूकें नहीं। इसके लिए प्रवेश द्वार की जांच के अलावा वार्डों और सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी, सीसीटीवी की प्रभावी मॉनिटरिंग, चेतावनी बोर्ड और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू करनी होगी।

वहीं सफाई कर्मचारियों की नियमित निगरानी, अस्पताल के प्रत्येक हिस्से की सफाई का रोस्टर और अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण भी व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

सीएमएचओ बोले—व्यवस्थाओं पर लगातार ध्यान
इस मामले में सीएमएचओ डॉ. राकेश राय ने बताया कि जिला अस्पताल में पहले 300 बेड की व्यवस्था थी, जिसे बढ़ाकर 450 बेड किया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में व्यवस्थाओं पर निरंतर ध्यान दिया जा रहा है।

हालांकि अस्पताल की स्वच्छता, गुटखा-तंबाकू के सेवन और इससे जुड़े नियमों के पालन को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर उन्होंने आगे की जानकारी के लिए पटेल साहब से बात करने की बात कही।

बड़ा सवाल

जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए बेड की संख्या 300 से बढ़ाकर 450 की गई है। यह निश्चित तौर पर बढ़ते मरीजों के दबाव को देखते हुए महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन सुविधाओं का विस्तार केवल बेड संख्या तक सीमित नहीं रह सकता। मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण, निगरानी और अनुशासन भी उतना ही जरूरी है।

अब सवाल यह है कि जब अस्पताल के गेट पर गुटखा-तंबाकू की जांच और जुर्माने की व्यवस्था है, तो अंदर दीवारों पर गुटखे के निशान क्यों दिखाई दे रहे हैं? यदि पर्याप्त सफाई व्यवस्था मौजूद है तो परिसर में गंदगी क्यों नजर आती है? और यदि मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण बेड क्षमता 450 तक बढ़ाई गई है, तो क्या संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्थाएं भी उसी स्तर पर मजबूत की गई हैं?

इन सवालों पर अस्पताल प्रबंधन की नियमित निगरानी और ठोस कार्रवाई से ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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