दमोह को ड्रग फ्री बनाने की मुहिम तेज, 15 जुलाई से शुरू होगा ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान..
कलेक्टर ने सभी विभागों को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश, मेडिकल स्टोर, रेलवे स्टेशन और अवैध अफीम की खेती पर रहेगी कड़ी निगरानी..
दमोह, 11 जुलाई। जिले को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से शनिवार को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान जिले में गांजा, अफीम की अवैध खेती, नशीले पदार्थों की तस्करी तथा प्रतिबंधित दवाइयों के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संयुक्त रणनीति तैयार की गई।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि युवाओं को नशे की लत से बचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जिले को ड्रग फ्री बनाने के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान के माध्यम से युवाओं और आमजन को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
बैठक में ड्रग इंस्पेक्टर को निर्देश दिए गए कि जिले के सभी मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रतिबंधित एवं नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों की अवैध बिक्री न हो। वहीं कृषि एवं वन विभाग को दूरस्थ क्षेत्रों में अवैध अफीम की खेती पर विशेष निगरानी रखने तथा ऐसी गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने आबकारी विभाग को अवैध शराब और प्रतिबंधित मादक पदार्थों के कारोबार पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए। साथ ही रेलवे स्टेशन और अन्य प्रमुख परिवहन माध्यमों पर विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा, ताकि बाहरी राज्यों से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
बैठक में कचरा बीनने वाले एवं गरीब परिवारों के बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की गई। कलेक्टर ने कहा कि ऐसे बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। स्कूल जाने वाले बच्चों को नशे की लत से दूर रखने के लिए समाज, शिक्षकों और अभिभावकों की सहभागिता से विशेष अभियान संचालित किया जाएगा।
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि ने बताया कि 15 जुलाई से “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 तक ड्रग फ्री इंडिया के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पुलिस, वन, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और आबकारी विभाग को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने प्रतिबंधित दवाओं और कफ सिरप की अवैध बिक्री पर रोक लगाने तथा पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम बनाकर अवैध तस्करी के खिलाफ लगातार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
बैठक के अंत में कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि जिले में मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध खेती और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध सतत एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि दमोह को नशामुक्त जिला बनाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया जा सके।



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