मोदी के जन्मदिन पर दीप जलाने को लेकर उठे सवाल, पं. देवलिया ने आयोजन और सरकारी खर्च पर जताई आपत्ति..

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दीप प्रज्वलन कार्यक्रम पर पं. मनोज देवलिया ने उठाए सवाल..

सरकारी अमले की ड्यूटी, तेल की खपत और यातायात व्यवस्था को लेकर जताई आपत्ति; कार्यक्रम के बाद दीयों से तेल निकालने का काम शुरू..

दमोह। सेवा संकल्प अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर जिलेभर में दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किए गए। दमोह शहर में कोतवाली से घंटाघर तक बड़ी संख्या में दीप जलाए गए। कार्यक्रम को लेकर सनातनी युवा पं. मनोज देवलिया ने प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर सवाल उठाते हुए इसे हिटलरशाही बताया है।

पं. मनोज देवलिया का कहना है कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सुबह से ही दीप प्रज्वलन कार्यक्रम की तैयारियों में लगाया गया। उन्होंने कहा कि शहर के व्यस्ततम मार्ग कोतवाली से घंटाघर तक सड़क की एक साइड को कार्यक्रम के चलते प्रभावित किया गया, जिससे यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा।

जन्मदिन पर दीप जलाने की परंपरा पर सवाल

पं. देवलिया ने सनातन परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि आम तौर पर दीपक का उपयोग धार्मिक आयोजनों, देवी-देवताओं, साधु-संतों अथवा दिवंगत व्यक्तियों की स्मृति में किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी जीवित व्यक्ति के जन्मदिन पर इस तरह बड़े पैमाने पर दीप प्रज्वलन क्यों किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

उन्होंने यह भी कहा कि इस आयोजन में बड़ी मात्रा में तेल का उपयोग किया गया, जिस पर खर्च होने वाली राशि जनता के टैक्स से आती है। उनका आरोप है कि लाखों रुपये के तेल का इस तरह उपयोग किया जाना सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े करता है। हालांकि तेल की वास्तविक मात्रा और उस पर हुए व्यय का आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।

सरकारी कर्मचारियों को लेकर भी उठाए सवाल

पं. देवलिया ने कहा कि सरकारी कर्मचारी दिनभर अपनी नियमित शासकीय ड्यूटी करने के बाद शाम के कार्यक्रम में भी लगाए गए। उनका कहना है कि कर्मचारियों से इस प्रकार के आयोजनों में काम लेने के बजाय उनसे उनके विभागीय कार्य कराए जाने चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्यक्रम मौजूदा सरकार के कार्यकाल का “अंतिम दिया” साबित होगा। यह उनकी राजनीतिक टिप्पणी है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

कार्यक्रम के बाद दीयों से तेल निकालने का काम

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद नगर पालिका के कर्मचारियों द्वारा मौके से दीपक उठाने और उनमें बचा तेल निकालकर बोतलों में एकत्र करने का काम शुरू किया गया। मौके पर इस प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा रही। कार्यक्रम समाप्त होने के कुछ समय बाद ही कर्मचारी दीयों को हटाते दिखाई दिए।

इस संबंध में नगर पालिका के एचओ से जानकारी लेने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है और विस्तृत जानकारी नगर पालिका सीएमओ से प्राप्त की जा सकती है। तेल की खरीद, उसकी मात्रा, खर्च और बाद में एकत्र किए गए तेल के उपयोग के संबंध में नगर पालिका की ओर से आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

गांवों में भी हुए दीप प्रज्वलन

जानकारी के अनुसार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किए गए। कुछ स्थानों पर करीब 500 दीप प्रज्वलित किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि यह प्रशासनिक कार्यक्रम के तहत आयोजित गतिविधि थी। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में दीप और तेल की व्यवस्था के लिए राशि प्रशासन की ओर से दी गई या ग्राम पंचायतों द्वारा अपने स्तर पर खर्च की गई, इसकी स्पष्ट आधिकारिक जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ ग्राम पंचायतों द्वारा कार्यक्रम पर स्वयं खर्च किए जाने की बात सामने आई है। इस खर्च का मद, स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया क्या रही, यह संबंधित पंचायतों से जानकारी मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

कीर्ति स्तंभ पर फिर शुरू हुआ फव्वारा और लाइट

इधर सेवा संकल्प अभियान के तहत दमोह शहर के कीर्ति स्तंभ चौराहे पर लंबे समय से बंद फव्वारा और लाइट व्यवस्था भी कार्यक्रम के दौरान फिर से चालू कर दी गई। इससे चौराहे की सजावट और रोशनी बेहतर दिखाई दी।

हालांकि शहरवासियों के बीच यह सवाल भी चर्चा में रहा कि फव्वारा और लाइट व्यवस्था कितने समय तक नियमित रूप से चालू रहेगी। पूर्व में ऐसी व्यवस्थाओं के बंद रहने के कारण लोगों में इनके रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

दीप प्रज्वलन कार्यक्रम को लेकर जहां प्रशासन इसे सेवा संकल्प अभियान के तहत जनभागीदारी और सामाजिक गतिविधि के रूप में आयोजित कर रहा है, वहीं पं. मनोज देवलिया ने सरकारी अमले की भागीदारी, तेल के उपयोग, खर्च और आयोजन की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों और आपत्तियों पर प्रशासन तथा नगर पालिका की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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