15 वर्षीय प्रिंस वाल्मीकि का भोपाल कुश्ती अकादमी के लिए चयन, मेहनत और लगन ने दिलाई प्रदेश स्तर पर पहचान..

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15 वर्षीय प्रिंस वाल्मीकि का भोपाल कुश्ती अकादमी के लिए चयन, मेहनत और लगन ने दिलाई प्रदेश स्तर पर पहचान..


दमोह। कहते हैं कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। अगर हौसला मजबूत हो और लक्ष्य पाने का जुनून हो तो विपरीत परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। इसका जीवंत उदाहरण दमोह के चैनपुरा बजरिया वार्ड क्रमांक-5 के 15 वर्षीय पहलवान प्रिंस वाल्मीकि ने पेश किया है। मध्य प्रदेश शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए आयोजित खेल अकादमी प्रतिभा खोज (टैलेंट सर्च) में प्रिंस का भोपाल स्थित प्रदेश स्तरीय कुश्ती अकादमी के लिए चयन हुआ है।


पिता ने बेटे को अखाड़े की राह दिखाई, बेटे ने मेहनत से सपना किया साकार..


प्रिंस वाल्मीकि के पिता मनोज वाल्मीकि नगर पालिका परिषद दमोह में सफाई संरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की प्रतिभा को पहचानते हुए उसे कुश्ती के अखाड़े में भेजा। पिता की इच्छा थी कि बेटा खेल के क्षेत्र में आगे बढ़े और अपना तथा परिवार का नाम रोशन करे।


प्रिंस ने भी पिता के विश्वास को अपनी मेहनत में बदल दिया। महज 12 वर्ष की उम्र से चैनपुरा बजरिया वार्ड क्रमांक-5 स्थित कुश्ती अखाड़े में अभ्यास शुरू करने वाले प्रिंस ने लगातार कठिन प्रशिक्षण और अनुशासन के बल पर प्रदेश की टैलेंट सर्च प्रतियोगिता तक का सफर तय किया।


NIS कोच धर्मेंद्र वंशवर्ती के मार्गदर्शन में तराशी प्रतिभा..


प्रिंस को कुश्ती की बारीकियां NIS अंतरराष्ट्रीय कुश्ती कोच एवं गोल्ड मेडलिस्ट पहलवान धर्मेंद्र वंशवर्ती तथा सीनियर पहलवान जितेंद्र के मार्गदर्शन में सीखने का अवसर मिला। नियमित अभ्यास, कठिन परिश्रम और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन ने प्रिंस की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


टैलेंट सर्च में चयन के साथ ही प्रिंस ने यह साबित कर दिया कि दमोह की मिट्टी में भी प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली प्रतिभाएं मौजूद हैं।


दमोह से भोपाल तक पहुंची अखाड़े की गूंज..


प्रिंस के चयन की खबर मिलते ही परिवार, प्रशिक्षकों और अखाड़े से जुड़े पहलवानों में खुशी का माहौल है। प्रिंस ने अपने चयन का श्रेय माता-पिता और अपने कोचों को देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य आगे भी कड़ी मेहनत करते हुए कुश्ती के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल करना है।


प्रिंस की इस उपलब्धि ने न केवल उनके माता-पिता और गुरुजनों का मान बढ़ाया है, बल्कि चैनपुरा बजरिया के कुश्ती अखाड़े और पूरे दमोह जिले को गौरवान्वित किया है। एक सफाई कर्मचारी के बेटे का छोटे से अखाड़े से निकलकर प्रदेश की कुश्ती अकादमी तक पहुंचना उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।


अब प्रिंस की नजर प्रदेश स्तर से आगे राष्ट्रीय कुश्ती के अखाड़े पर है।

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