दमोह में ‘सड़क से गौशाला’ अभियान को मिलेगी गति, एनएचएआई ने उपलब्ध कराया नया काउ लिफ्टर वाहन..

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दमोह में ‘सड़क से गौशाला’ अभियान को मिलेगी गति, एनएचएआई ने उपलब्ध कराया नया काउ लिफ्टर वाहन..


अब तक करीब 6 हजार निराश्रित गौवंश को पहुंचाया गया गौशालाओं में, कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने गौपालकों से की सड़क पर मवेशी नहीं छोड़ने की अपील..


दमोह। जिले में सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित गौवंश को सुरक्षित रूप से गौशालाओं तक पहुंचाने के लिए चलाए जा रहे ‘सड़क से गौशाला’ अभियान को अब और गति मिलेगी। अभियान में वाहनों की उपलब्धता की समस्या को देखते हुए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निर्देश पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) प्रबंधन ने नया काउ लिफ्टर वाहन उपलब्ध कराया है। 8 अक्टूबर को वाहन को हरी झंडी दिखाकर अभियान के लिए रवाना किया गया।


कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य गौवंश को सड़कों पर बैठने और सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होने से बचाना है। सड़कों पर गौवंश की मौजूदगी से यातायात प्रभावित होता है और कई बार दुर्घटनाओं में पशुओं के साथ आमजन भी घायल हो जाते हैं। ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए निराश्रित गौवंश को सुरक्षित रूप से गौशालाओं तक पहुंचाने का काम लगातार जारी रहेगा।


उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक जिले के सभी निराश्रित गौवंश को सुरक्षित रूप से गौशालाओं तक नहीं पहुंचा दिया जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा। ग्राम पंचायतों और हांका दलों की मदद से गौवंश को गौशालाओं तक पहुंचाया जा रहा है। शहर में सांड और नंदी जैसे बड़े गौवंश को पकड़कर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए काउ लिफ्टर वाहन की मदद ली जा रही है।


अब तक करीब 6 हजार गौवंश गौशालाओं में पहुंचाए..


कलेक्टर यादव ने बताया कि अभियान के तहत अब तक करीब छह हजार गौवंश को गौशालाओं में पहुंचाया जा चुका है। उन्होंने गौपालकों से अपील की कि वे अपने मवेशियों को सुरक्षित परिसर में रखें। यदि किसी कारणवश गौवंश को रखना संभव नहीं है, तो उसे गौशाला पहुंचाएं। ऐसा करने में असमर्थ होने पर प्रशासन की मुहिम में सहयोग करें।
उन्होंने कहा कि गौवंश की सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। जनभागीदारी से ही सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और गौवंश को सुरक्षित रखने के प्रयास प्रभावी हो सकेंगे।


गौ-संरक्षण में समाज की भागीदारी जरूरी..


समाजसेवी भाव सिंह लोधी (मासाब) ने कहा कि गौ-संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपने मवेशियों को सुरक्षित बांधकर रखने तथा उनके चारा-पानी और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति और गौ-आधारित जीवन पद्धति का महत्वपूर्ण आधार है। गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है और पशुपालन आजीविका का साधन भी बन सकता है। प्रशासनिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी जुड़ने से जिले में गौ-संरक्षण अभियान को और प्रभावी बनाया जा सकता है।


संजय यादव ने अभियान की सराहना करते हुए गौपालकों से आग्रह किया कि वे अपने गौवंश को सड़कों पर खुला न छोड़ें और प्रशासन की मुहिम में सहयोग करें, ताकि आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके।


रात में दुर्घटनाएं रोकने के लिए सींगों पर रेडियम लगाने का सुझाव
लाल चंद राय ने कहा कि सड़क पर बैठे गौवंश को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल पशुओं की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने जिलेवासियों से गौवंश की रक्षा और सुरक्षा में सहयोग करने की अपील की।


साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि सड़कों पर बैठे गौवंश के सींगों पर रेडियम पट्टी लगाई जाए, जिससे रात के समय वाहन चालकों को दूर से ही पशुओं की मौजूदगी का संकेत मिल सके। इससे अंधेरे में होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने और वाहन चालकों के साथ गौवंश की सुरक्षा में मदद मिल सकती है।

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