देवेन्द्र हत्याकांड में साजिशकर्ताओं को बचाने का आरोप, परिजनों ने एसपी को सौंपा 15 बिंदुओं का आवेदन
कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और टावर लोकेशन की फॉरेंसिक जांच की मांग; आठ लोगों को आरोपी बनाने की उठाई मांग
दमोह। ग्राम बरवांसा में 12 मई 2026 को हुए देवेन्द्र सिंह राजपूत हत्याकांड में पुलिस विवेचना को लेकर मृतक के परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मृतक के बड़े भाई जितेन्द्र सिंह राजपूत ने पुलिस अधीक्षक दमोह को 15 बिंदुओं का शिकायती आवेदन सौंपकर हत्याकांड में कथित रूप से शामिल अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि मामले में साजिशकर्ताओं को जानबूझकर बचाया जा रहा है और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को विवेचना में शामिल नहीं किया गया है।
आवेदन के अनुसार, घटना के अगले दिन 13 मई को थाना दमोह देहात में अपराध क्रमांक 292/2026 के तहत वैभव, विशाल और अभिषेक के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। बाद में विवेचना के दौरान भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) जोड़ी गई तथा नरेश, दुर्गेश और भारतेन्दु प्यासी को भी आरोपी बनाया गया। हालांकि, शिकायतकर्ता का कहना है कि हत्या के पीछे व्यापक साजिश थी, जिसकी पूरी जांच नहीं की गई।
फोन कॉल और सीसीटीवी फुटेज को लेकर सवाल
शिकायती आवेदन में आरोप लगाया गया है कि मुख्य आरोपी अभिषेक ने अपने मेमोरेंडम कथन में हत्या के तुरंत बाद 12 मई को दोपहर करीब 3 बजकर 46 मिनट पर भारतेन्दु प्यासी को फोन कर घटना की जानकारी देने की बात स्वीकार की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, पुलिस के पास इस बातचीत की सीडी भी मौजूद है, लेकिन उसे चालान में शामिल नहीं किया गया।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि हत्या में इस्तेमाल मोटरसाइकिल क्रमांक MP 34 ZE 0446 से आरोपी घटनास्थल पर पहुंचे थे। आरोप है कि घटना के बाद वे करीब 24 घंटे तक दमोह के पलंदी चौराहा स्थित एक भवन में रुके रहे, जहां उनकी मुलाकात हर्ष राजपूत और जागेश्वर रजक से हुई। परिजनों ने संबंधित भवन की सीसीटीवी फुटेज जब्त नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
कॉल डिटेल के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग
जितेन्द्र सिंह राजपूत ने अपने आवेदन में कॉल डिटेल का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि घटना के करीब 10 मिनट के भीतर वैभव, विशाल और नरेश ने हर्ष राजपूत के मोबाइल पर कॉल किए थे। वहीं, आवेदन में दावा किया गया है कि विशाल द्वारा इस्तेमाल की जा रही सिम अमर सेन के नाम की आईडी पर जारी थी और अमर सेन को मामले में गवाह बनाया गया है।
शिकायतकर्ता ने रमेश सिंह, रणवीर और धरमवीर पर परिवार की महिलाओं के मोबाइल फोन के माध्यम से मृतक की गतिविधियों की जानकारी आरोपियों तक पहुंचाने का आरोप भी लगाया है। साथ ही, फरियादी पक्ष को फोन पर धमकियां दिए जाने की बात कही गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आठ लोगों को आरोपी बनाने और फॉरेंसिक जांच की मांग
पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए आवेदन में रमेश सिंह राजपूत, धरमवीर सिंह राजपूत, रणवीर सिंह राजपूत, हर्ष राजपूत, अरविंद पाण्डे, अमर सेन, भारतेन्दु प्यासी और जागेश्वर रजक को भी आरोपी बनाए जाने की मांग की गई है।
परिजनों ने अपने द्वारा प्रस्तुत 27 पन्नों की सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन और आईएमईआई रिपोर्ट की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। साथ ही, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63(4) के तहत आवश्यक प्रमाण पत्र सहित संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को विवेचना के रिकॉर्ड में शामिल करने का अनुरोध किया है।
परिजनों का कहना है कि हत्याकांड की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर सभी संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि मामले में किसी भी दोषी को बचने का अवसर न मिले। फिलहाल, शिकायती आवेदन में लगाए गए आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।


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