मध्यप्रदेश में मंत्रियों की कार्यशैली की होगी समीक्षा, विवादित मंत्रियों की छुट्टी के संकेत..

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मध्यप्रदेश में मंत्रियों की कार्यशैली की होगी समीक्षा, विवादित मंत्रियों की छुट्टी के संकेत

विभागीय योजनाओं की प्रगति और फैसलों के क्रियान्वयन पर बनेगी रिपोर्ट, मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में भी हो सकता है बदलाव

भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार में मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों के बीच एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्रियों के कामकाज, विभागीय योजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक फैसलों के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा कराने की तैयारी में हैं। इसके लिए मुख्य सचिव कार्यालय के माध्यम से विभागवार रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर मंत्रियों के विभागों में फेरबदल और उनके प्रभार वाले जिलों में बदलाव किया जा सकता है।

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार और पुनर्गठन को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी नहीं मिलने के चलते मंत्रिमंडल में बदलाव की प्रक्रिया टलने की चर्चा है। ऐसे में विभागों के पुनर्वितरण को लेकर संभावनाएं अधिक जताई जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य विभागीय कामकाज में तेजी लाने और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बेहतर संतुलन बनाने का है।

तीन साल के कामकाज का होगा आकलन

मुख्यमंत्री के निर्देश पर तैयार की जा रही रिपोर्ट में मंत्रियों के लगभग तीन साल के कार्यकाल का आकलन किए जाने की चर्चा है। इसमें विभागीय योजनाओं की प्रगति, विकास परियोजनाओं की स्थिति, प्रशासनिक गतिविधियों और सरकारी फैसलों के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।

रिपोर्ट में यह भी देखा जाएगा कि किस मंत्री ने अपने विभाग को कितनी प्राथमिकता दी और योजनाओं को जमीन पर उतारने में उसकी भूमिका कैसी रही। विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली और मंत्री-अधिकारी समन्वय को भी समीक्षा का हिस्सा बनाए जाने की संभावना है।

जिन विभागों में कामकाज अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाया जाएगा, वहां जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्रियों की विभागीय गतिविधियों में कम रुचि और योजनाओं के क्रियान्वयन में धीमी गति को लेकर सत्ता और संगठन के स्तर पर चर्चा होती रही है।

प्रभार वाले जिलों में भी बदलाव की तैयारी

मंत्रियों के विभागों के साथ उनके प्रभार वाले जिलों में भी बदलाव किए जाने की संभावना है। वर्तमान में कुछ मंत्रियों के पास ऐसे जिले हैं, जो उनके गृह जिले या क्षेत्र से काफी दूर हैं। ऐसे में जिलों का दौरा करने और स्थानीय प्रशासनिक गतिविधियों पर नजर रखने में समय और संसाधन अधिक खर्च होते हैं।

सरकार की कोशिश है कि मंत्रियों को उनके विभागीय दायित्वों के साथ ऐसे जिले दिए जाएं, जहां वे नियमित रूप से दौरे कर सकें और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी रख सकें। इससे विकास कार्यों की समीक्षा और जनसमस्याओं के निराकरण में तेजी आने की उम्मीद है।

विवादों में रहे मंत्रियों पर भी नजर

मंत्रियों की कार्यशैली और सार्वजनिक छवि की समीक्षा के बीच उन मंत्रियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, जो पिछले कुछ समय में विवादों में रहे हैं। हालांकि, किसी मंत्री को हटाने या विभाग बदलने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

राजनीतिक चर्चाओं में नागर सिंह चौहान, लखन पटेल, विजय शाह, प्रतिमा बागरी और नरेंद्र शिवाजी पटेल जैसे नामों का उल्लेख किया जा रहा है।

नागर सिंह चौहान से पहले वन विभाग वापस लिया जा चुका है। लखन पटेल से भी पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी हटाई गई थी। विजय शाह की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विवाद सामने आया था। प्रतिमा बागरी के परिजनों पर मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े आरोपों को लेकर चर्चा हुई, जबकि नरेंद्र शिवाजी पटेल के बेटे पर भोपाल में मारपीट के आरोप लगे थे।

इन मामलों में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आरोपों और राजनीतिक विवादों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मंत्रियों के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के स्तर पर ही लिया जाएगा।

2028 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार की कसौटी

मध्यप्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव वर्ष 2028 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से संगठन और सत्ता की तैयारियां तेज कर दी हैं। कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरी को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल द्वारा नेताओं को चेतावनी दिए जाने की चर्चा है।

वहीं, भाजपा के लिए भी मंत्रियों का प्रदर्शन, जनता के बीच उनकी छवि और विकास कार्यों का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के सामने चुनौती है कि विभागीय योजनाओं की गति बढ़ाई जाए और प्रशासनिक फैसलों का लाभ आम जनता तक समय पर पहुंचे।

ऐसे में मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा को आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभागवार रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्रियों के विभागों में बदलाव करते हैं या मंत्रिमंडल पुनर्गठन को लेकर कोई बड़ा फैसला लेते हैं।

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