दमोह जिला अस्पताल के पीछे रैन बसेरा में रात को लटका मिला ताला, ठंड में भटकते रहे मृत बच्ची के परिजन
बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर खुलवाया रैन बसेरा, करीब सात लोगों को मिली रात्रि विश्राम की सुविधा
शौचालय में गंदगी, पानी की व्यवस्था नहीं होने का आरोप; अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों ने फोन तक नहीं उठाया
दमोह। जिला अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को रात्रि विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया रैन बसेरा इन दिनों अव्यवस्थाओं का शिकार नजर आ रहा है। शासन की मंशा गरीब और जरूरतमंद लोगों को ठहरने की सुविधा देने की है, लेकिन दमोह जिला अस्पताल के पीछे स्थित रैन बसेरा रात के समय ताले में कैद मिला। ऐसे में दूरदराज से आए जरूरतमंद लोगों को रात में भटकने के लिए मजबूर होना पड़ा। बीती रात रैन बसेरा में ताला लगा होने के कारण परेशान हुए लोगों की मदद के लिए सामाजिक संगठन के कार्यकर्ता आगे आए और ताला खुलवाकर करीब सात लोगों के रात्रि विश्राम की व्यवस्था कराई।
मृत बच्ची के परिजन पहुंचे रैन बसेरा, लेकिन दरवाजे पर मिला ताला
जानकारी के अनुसार, नोहटा थाना क्षेत्र की लरगुवां ग्राम पंचायत निवासी आठ वर्षीय बच्ची को बीती रात करंट लग गया था। परिजन उसे लेकर दमोह जिला अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए शवगृह में रखवा दिया गया।
बच्ची के दादा मक्कू सहित कंछेदी अहिरवार और अन्य परिजन जिला अस्पताल पहुंचे थे। परिवार में करीब चार पुरुष और तीन महिलाएं शामिल थीं। बच्ची की मौत से परिवार पहले ही गहरे सदमे में था। ऐसे कठिन समय में परिजनों ने रात गुजारने के लिए अस्पताल के पीछे बने रैन बसेरा का रुख किया, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें दरवाजे पर ताला लटका मिला।
रात के समय ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं होने से परिजन परेशान होते रहे। एक ओर परिवार अपनी बच्ची को खोने के दुख में था, वहीं दूसरी ओर शासन की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधा का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा था।
सूचना मिलते ही पहुंचे बजरंग दल कार्यकर्ता, खुलवाया ताला
रैन बसेरा में ताला लगा होने की सूचना हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं को मिली। इसके बाद बजरंग दल के नगर सुरक्षा प्रमुख बाबू शर्मा और उनके सहयोगी मौके पर पहुंचे।
कार्यकर्ताओं ने रैन बसेरा का ताला खुलवाया और करीब सात लोगों के रात्रि विश्राम की व्यवस्था कराई। संगठन के हस्तक्षेप के बाद परेशान परिजनों को राहत मिली।
बुजुर्ग मक्कू ने बताया कि यदि संगठन के कार्यकर्ता मौके पर नहीं पहुंचते, तो उन्हें पूरी रात ठंड में परेशान होकर गुजारनी पड़ती। यह स्थिति जिला अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
ड्यूटी कर्मचारी ने कहा- रात में अंदर से लगा देते हैं ताला
रैन बसेरा में ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी इमरान खान से जब रात में ताला लगाए जाने के संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि रात के समय अंदर से ताला लगा दिया जाता है।
जब उनसे पूछा गया कि रैन बसेरा लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया है, तो फिर इसे बंद क्यों रखा जाता है? इस पर कर्मचारी ने बताया कि बाहर से लोग शौचालय का उपयोग करने के लिए अंदर आते हैं। उन्होंने शौचालय में गंदगी और पानी की व्यवस्था नहीं होने की बात भी कही।
अब सवाल यह है कि यदि रैन बसेरा में शौचालय की सफाई नहीं होती और पानी तक उपलब्ध नहीं है, तो फिर यहां ठहरने वाले जरूरतमंद लोगों को बुनियादी सुविधाएं कैसे मिलेंगी? क्या केवल भवन बनाकर ताला लगा देना ही शासन की योजनाओं का संचालन है?
पूर्व कलेक्टर के निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था?
रैन बसेरा की व्यवस्थाओं को लेकर पूर्व में भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। बताया जाता है कि तत्कालीन कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने शिकायत मिलने पर रैन बसेरा का निरीक्षण किया था और कुछ कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई भी की थी।
इसके बावजूद यदि रात के समय रैन बसेरा में ताला लगा मिलता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पूर्व में की गई कार्रवाई का असर आखिर कहां गया?
अस्पताल प्रबंधन और रैन बसेरा में तैनात कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ कर्मचारी शराब के नशे में ड्यूटी करते हैं। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी जांच आवश्यक है।
सरकारी खर्च से बनी सुविधा, फिर गरीबों को क्यों नहीं मिल रहा लाभ?
जिला अस्पताल में प्रतिदिन दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज और उनके परिजन उपचार के लिए पहुंचते हैं। कई बार मरीजों की मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम या अन्य औपचारिकताओं के कारण परिजनों को रातभर अस्पताल परिसर में रुकना पड़ता है।
ऐसे लोगों के लिए रैन बसेरा किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। लेकिन यदि रात में ही इसे बंद कर दिया जाए, तो इसका उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।
शासन द्वारा गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए बनाई गई इस सुविधा का संचालन व्यवस्थित तरीके से होना चाहिए। रैन बसेरा में साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय और रात के समय प्रवेश की व्यवस्था सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
जिम्मेदार अधिकारियों ने नहीं उठाया फोन
इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश राय, सिविल सर्जन डॉ. प्रह्लाद पटेल, आरएमओ डॉ. दिवाकर पटेल एवं अस्पताल प्रबंधक सुरेंद्र विक्रम सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन रिसीव नहीं किया।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाने के कारण रैन बसेरा की व्यवस्थाओं को लेकर अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आ सका।
अब जिला प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
रैन बसेरा में ताला लगाए जाने, शौचालय में गंदगी और पानी की व्यवस्था नहीं होने की शिकायतों के बाद अब जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला अस्पताल के पीछे गरीबों और मरीजों के परिजनों के लिए रैन बसेरा बनाया गया है, तो रात के समय वहां ताला क्यों लगाया जाता है? जरूरतमंद लोगों को ठहरने की सुविधा देने के बजाय उन्हें भटकने के लिए क्यों मजबूर किया जाता है?
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रैन बसेरा की व्यवस्थाओं में सुधार करते हैं या फिर गरीब और जरूरतमंद लोगों को इसी तरह परेशान होना पड़ेगा।


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