36 माह से 37 कर्मचारियों को रवि सिक्यूरिटी नहीं दे रही पूरी वेतन..

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36 माह से 37 कर्मचारियों को रवि सिक्यूरिटी नहीं दे रही पूरी वेतन..
39 लाख 60 हजार रुपए वेतन के भी हड़प गई..
सवा करोड़ से अधिक का किया घोटाला..

दमोह – जिला अस्पताल में कार्यरत सर्विस प्रोवाइडर कंपनी रवि सिक्यूरिटी द्वारा कर्मचारियों के वेतन में गोलमाल पिछले 36 माह से किया जा रहा है। इस कंपनी द्वारा कार्यरत 37 कर्मचारियों का हर माह 3 हजार रुपए कम वेतन दिया जाता रहा है। जिससे इसके द्वारा 39 लाख 60 हजार रुपए कर्मचारियों के वेतन के भी हड़प लिए गए हैं।

रवि सिक्यूरिटी कंपनी का कर्ताधर्ता रवि ठाकुर कार्यरत कर्मचारियों का शोषण कर रहा है, इस शोषण के खिलाफ जिन कर्मचारियों ने भी आवाज उठाई उन्हें इसने बगैर नोटिस के बाहर का रास्ता दिखा दिया। रवि सिक्यूरिटी को राजनीतिक रसूख का इतना दंभ है कि वह कलेक्टर, सीएमएचओ, सीएस व अस्पताल प्रबंधन को कुछ भी नहीं समझता है। अपने कर्मचारियों पर धौंस जमाने के लिए वह आला अधिकारियों तक के लिए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करता है। जिससे अपने वेतन और भविष्यनिधि के शोषण के शिकार हो रहे निम्न तबके के कर्मचारी इसकी दबंगई के आगे नतमस्तक नजर आते हैं।

8 माह तक कर्मचारी की वेतन डकारी

रवि सिक्यूरिटी द्वारा जिन भी कर्मचारियों को बाहर किया जाता था, उनकी आधी वेतन देता था। इसके बाद कई महीनों तक उसी कर्मचारी की वेतन स्वयं निकाली जाती थी। इस तरह के घोटाले भी किए गए। इसके द्वारा भूपेंद्र अहिरवार को बाहर किया गया था। जिसने भविष्य निधि और पूरी वेतन 11 हजार 32 मांगीं लेकिन उसे बाहर कर 7 हजार रुपए दिए गए। इसके अलावा करीब 8 माह तक इस कर्मचारी के नाम से स्वयं वेतन आहरण कर करीब 90 हजार रुपए डकार गया।

बिल लग रहा 16 का कर्मचारी 10

रवि सिक्यूरिटी द्वारा हर माह संख्या बल में भी हेरफेर की जा रही है। वार्ड में 16 कर्मचारियों की तैनाती दर्शायी जाती है, जबकि 10 कर्मचारियों से 16 कर्मचारियों का काम लेकर उनका मानसिक शोषण किया जाता है। हर माह बिल 16 कर्मचारियों का वसूला जाता है। इस तरह यह कंपनी कर्मचारियों का शारीरिक, मानसिक व आर्थिक शोषण कर रही है।

अधिकारी क्यों झेल रहे

पिछले साढ़े तीन साल से रवि सिक्यूरिटी कर्मचारियों का खुला शोषण कर रही है। कम कर्मचारियों लगाकर ज्यादा कर्मचारियों का बिल भुना रही है। इस मनमानी पर अधिकारी क्यों झेल रहे हैं यह समझ से परे है। दबीं जुवां में यह बात भी चलती है कि लिपिक उमेश बागरी और रवि सिक्यूरिटी की मिली भगत होती है, जो अधिकारियों को भी साध लेते हैं, इसलिए कर्मचारियों का अनवरत शोषण अब भी जारी है।

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