दो दशक पुराना व्यारमा नदी पर बना पुल खतरे की कगार पर, समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो हो सकता है बड़ा हादसा..
दमोह। जिले के जनपद पंचायत दमोह अंतर्गत ग्राम दासोंदा-दासोंदी में व्यारमा नदी पर दो दशक पूर्व बुंदेलखंड पैकेज के तहत बनाए गए पुल की स्थिति इन दिनों बेहद जर्जर हो गई है। गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे गांव के लोगों ने देखा कि पुल के दासोंदा गांव की ओर स्थित तीसरे और चौथे पाया के ऊपर का फाउंडेशन क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल में दरारें स्पष्ट नजर आने लगी हैं और जैसे ही वाहन इस पर से गुजरते हैं, पुल हिलने लगता है। यह स्थिति लोगों में भय का कारण बन रही है।
इसके बावजूद भी ग्रामीणों में कोई भय नहीं दिख रहा है और लोग लगातार वाहनों से इस पुल को पार कर रहे हैं। यदि समय रहते संबंधित विभाग द्वारा बैरिकेडिंग कर आवश्यक सुधार कार्य नहीं किया गया, तो कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है।
यह पुल दमोह, जबेरा और तेंदूखेड़ा इन तीन प्रमुख विकासखंडों को जोड़ता है, और इनसे जुड़े दर्जनों गांवों के लिए यह पुल एकमात्र प्रमुख मार्ग है। इसे ‘राम सेतु’ की तरह जीवनरेखा माना जाता है। पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित है, फिर भी आए दिन ओवरलोड ट्रक और अन्य भारी वाहन इस पुल से गुजरते देखे जा सकते हैं, जिससे स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है।
पुल की खस्ताहाल की जानकारी जब PWD के कार्यपालन यंत्री बद्री खरे को देने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद दमोह एसडीएम आर. एल. बागरी से बात की गई, जिन्होंने आश्वासन दिया कि “जो भी संभव प्रयास होंगे, किए जाएंगे।”
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कराए, अन्यथा यहां एक बड़ी जनहानि की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।



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