बुजुर्ग ऑटो चालक पर चाकू से हमला, रेलवे स्टेशन क्षेत्र में फैली दहशत..

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बुजुर्ग ऑटो चालक पर चाकू से हमला, रेलवे स्टेशन क्षेत्र में फैली दहशत.

एंबुलेंस सेवा की लापरवाही उजागर, देर से इलाज के चलते एक मरीज की मौत..

दमोह। शहर में अपराध और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर खुलकर सामने आई है। बीती रात रेलवे स्टेशन क्षेत्र में 65 वर्षीय बुजुर्ग ऑटो चालक पर चाकू से हमला कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर एंबुलेंस सेवा की लापरवाही के चलते एक अन्य मरीज की जान चली गई। इन दोनों घटनाओं ने शहर की कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रेलवे स्टेशन के पास बुजुर्ग ऑटो चालक पर हमला

जानकारी के अनुसार दयाल विश्वकर्मा नाम के ऑटो चालक देर रात करीब 1 बजे सवारियां लेकर रेलवे स्टेशन क्षेत्र से गुजर रहे थे। इसी दौरान कुछ अज्ञात लोगों ने उनका ऑटो रुकवाया और गाली-गलौज करते हुए उन पर चाकू से हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से ऑटो में बैठी सवारी जान बचाकर मौके से भाग गई।

घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायल को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उन्हें जबलपुर रेफर कर दिया गया।
तीन घंटे तक नहीं मिली एंबुलेंस
घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई। गंभीर हालत में मरीज को रेफर किए जाने के बावजूद रातभर 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। अस्पताल स्टाफ और परिजनों द्वारा लगातार प्रयास किए गए, लेकिन एंबुलेंस सुबह करीब 5:30 बजे ही मिल पाई।
परिजनों के अनुसार, एंबुलेंस के लिए कई बार कॉल किए गए। वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र दुबे द्वारा भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। बाद में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को सूचना देने के करीब दो घंटे बाद एंबुलेंस उपलब्ध हो सकी।

इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब वरिष्ठ स्तर पर हस्तक्षेप के बाद भी इतनी देरी हो रही है, तो आम नागरिकों को आपात स्थिति में कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता होगा।

एंबुलेंस व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और अस्पताल स्टाफ का कहना है कि दिन के समय तो एंबुलेंस मिल जाती है, लेकिन रात में अक्सर यही स्थिति बनी रहती है। कई बार कॉल करने के बावजूद लंबी प्रक्रिया और बार-बार जानकारी मांगे जाने के कारण समय पर मदद नहीं मिल पाती।

ग्रामीण और गरीब वर्ग के लोग मजबूरी में निजी एंबुलेंस का सहारा लेते हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। वहीं स्थानीय स्तर पर स्टाफ यह कहकर पल्ला झाड़ लेता है कि 108 सेवा का संचालन भोपाल से होता है।

दो घंटे की देरी, मरीज की मौत..


इसी बीच तेजगढ़ थाना क्षेत्र से एक और चिंताजनक मामला सामने आया। गुड्ड रैकवार नामक व्यक्ति को ब्रेन हेमरेज होने पर परिजनों ने कई बार 108 एंबुलेंस को कॉल किया, लेकिन दो घंटे तक कोई सहायता नहीं मिली। अंततः परिजन निजी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती, तो उनकी जान बच सकती थी।


प्रशासन के लिए चुनौती बनी स्थिति..


एक तरफ शहर के व्यस्त रेलवे स्टेशन क्षेत्र में चाकूबाजी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर एंबुलेंस सेवा की बदहाल स्थिति ने स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोल दी है।

अधिकारी का बयान..

सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल ने बताया कि 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन भोपाल से होता है। कई बार वाहन अन्य स्थानों पर होने के कारण देरी हो जाती है।
कुल मिलाकर, दमोह में बढ़ती आपराधिक घटनाएं और स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था से उठ सकता है।

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