दमोह : 08 दिसम्बर 2023
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा कृषकों के खेतों में भ्रमण उपरांत जो समस्याएं दिखाई दीं, उनके निराकरण हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. राजेश द्विवेदी ने समसामयिक जानकारी दी है।
उन्होंने कृषकगणों से कहा है विगत दिनों वर्षा होने के कारण यदि खेतों में जल जमाव की स्थिति है, तो जल की निकासी करें। यदि गेहूँ की फसल 20-21 दिनों की हो गई है, तो यूरिया 50 किलो/एकड़ की दर से टॉप ड्रेसिंग करें और गेहूँ में चौड़ी एवं सकरी पत्ती के खरपतवारों का प्रकोप दिखाई देने पर क्लोडिनोफॉप+मेटसल्फ्यूरॉन (व्यापारिक नाम वेस्टा या संदेश ) 400 ग्राम/हेक्टेयर का छिड़काव करने से सभी प्रकार के खरपतवारों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
गेहूँ में कहीं-कहीं दीमक एवं वायर वर्म का प्रकोप भी देखने में मिल रहा है, इसके नियंत्रण हेतु कृषक फेप्रानिल ( व्यापारिक नाम रीजेंट) 3 किलो/एकड़ की दर से या 500 एम.एल./एकड़ की दर से उपयोग किया जाये। मसूर में माहू का प्रकोप दिखाई देने पर थायोमेथाक्सॉम 25 डब्ल्यू. जी. (व्यापारिक नाम अरेवा या इक्टारा) 100 ग्राम/एकड़ की दर से उपयोग किया जाना चाहिये।
चने में कटुआ इल्ली का प्रकोप दिखाई देने पर इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एस.जी. ( व्यापारिक नाम रेलॉन, एमनार्म) 100 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव किया जाये। मटर में ब्लाइट एवं मिलड्यू रोग का प्रकोप दिखाई देने पर टेबुकोनाजोल + सल्फर ( व्यापारिक नाम स्वाधीन) एक किलो/हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिये।
उन्होंने कहा किसी भी प्रकार की खेती किसानी से संबंधित समस्याओं के निराकरण हेतु कृषकगण कृषि विज्ञान केंद्र दमोह संपर्क कर सकते है।


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