देवलाई में बदहाल शिक्षा व्यवस्था: किराए के दो कमरों में भविष्य तलाश रहे 57 विद्यार्थी..
हटा। हटा ब्लॉक के देवलाई गांव से बदहाल शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। यहां माध्यमिक स्कूल का संचालन सरकारी भवन के बजाय किराए के महज दो कमरों में किया जा रहा है। इन दो कमरों में कक्षा 1 से 8वीं तक के करीब 57 विद्यार्थी पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जर्जर हो चुके स्कूल भवन की मरम्मत नहीं होने और नया भवन नहीं बनने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जर्जर भवन के कारण वैकल्पिक व्यवस्था..
जानकारी के अनुसार देवलाई का स्कूल भवन लंबे समय से जर्जर हालत में है। कुछ वर्ष पूर्व भवन सुधार के लिए राशि स्वीकृत की गई थी। इसके अलावा ग्राम पंचायत को गौण खनिज मद से भी राशि मिली थी, लेकिन उपलब्ध राशि भवन की स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकी।
बताया गया कि जनपद शिक्षा केंद्र हटा के निर्देश पर जनशिक्षक द्वारा गांव का दौरा कर वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय काईखेड़ा में बच्चों की पढ़ाई कराने के आदेश दिए गए थे। हालांकि देवलाई से काईखेड़ा की दूरी अधिक होने और बच्चों के वहां पहुंचने में परेशानी को देखते हुए शिक्षकों ने गांव में ही किराए के दो कमरों में स्कूल संचालन की व्यवस्था कर ली।
दो कमरों में चल रही आठ कक्षाओं की पढ़ाई..
एक ही परिसर में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। सीमित जगह में 57 से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई होने से शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के लिए गांव में ही बेहतर और सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाने की मजबूरी न रहे।
एसडीएम ने किया जर्जर भवन का निरीक्षण..
मामला सामने आने के बाद हटा एसडीएम राकेश मरकाम देवलाई गांव पहुंचे और जर्जर स्कूल भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि डीएमएफ की राशि ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध है, जबकि स्कूल की एसएमसी के पास भी राशि मौजूद है। हालांकि दोनों मदों में उपलब्ध राशि भवन के सुधार के लिए पर्याप्त नहीं है।
एसडीएम ने सीईओ जनपद पंचायत और बीआरसी को स्कूल भवन के लिए एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दोनों मदों में उपलब्ध राशि को संयुक्त रूप से उपयोग करते हुए आवश्यक कार्य कराने के लिए निर्देशित किया गया है।
अब देखना होगा कि प्रशासन के निर्देश के बाद जर्जर स्कूल भवन की स्थिति में कितना सुधार होता है और गांव के बच्चों को कब अपना सुरक्षित एवं स्थायी स्कूल भवन मिल पाता है।


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