शव वाहन के इंतजार में दो घंटे बारिश में बैठे रहे परिजन, निजी वाहन से पीएम हाउस ले जाना पड़ा शव…

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शव वाहन के इंतजार में दो घंटे बारिश में बैठे रहे परिजन, निजी वाहन से पीएम हाउस ले जाना पड़ा शव…

दमोह। दमोह जिला अस्पताल में शव वाहन की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि मृतक के परिजनों को शव को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने के लिए करीब दो घंटे तक बारिश में शव वाहन का इंतजार करना पड़ा, लेकिन वाहन समय पर नहीं पहुंचा। आखिरकार परेशान परिजनों को निजी वाहन की व्यवस्था कर शव को पीएम हाउस ले जाना पड़ा।

दो शव वाहन, तीन पायलट फिर भी नहीं मिली सुविधा

जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में प्रशासन द्वारा दो शव वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इनका उद्देश्य मृतकों के परिजनों को शव अस्पताल से पोस्टमार्टम हाउस अथवा निर्धारित स्थान तक ले जाने की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराना है। इन वाहनों के संचालन के लिए तीन पायलट की ड्यूटी निर्धारित बताई गई है। इनमें दो पायलट सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक और एक पायलट रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक ड्यूटी पर रहता है।

इसके बावजूद सामने आए मामले में परिजनों को शव वाहन की सुविधा नहीं मिल सकी।

अज्ञात कारणों से हुई थी प्रिंस राय की मौत

दरअसल, प्रिंस राय पिता दीपक राय की अज्ञात कारणों के चलते मौत हो गई थी। परिजनों के अनुसार, शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने के लिए उन्होंने शव वाहन से संपर्क किया। परिजन बारिश के बीच करीब दो घंटे तक शव वाहन का इंतजार करते रहे, लेकिन वाहन मौके पर नहीं पहुंचा।

परिजनों का आरोप है कि शव वाहन के संबंध में जब संपर्क किया गया तो संतोष पुरी से बातचीत हुई। परिजनों के मुताबिक संतोष पुरी ने बताया कि वह सागर में हैं। ऐसे में परिजनों ने शव वाहन की व्यवस्था और पायलट की ड्यूटी को लेकर सवाल उठाए हैं।

दूसरे पायलट को नहीं मिली थी सूचना

कुछ देर बाद दूसरे पायलट रूपेश रजक मौके पर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक रूपेश रजक ने बताया कि उन्हें शव वाहन के लिए कोई इवेंट या सूचना प्राप्त नहीं हुई थी। जानकारी मिलते ही वह मौके पर पहुंचे।

हालांकि तब तक परिजन करीब दो घंटे बारिश में शव वाहन का इंतजार कर चुके थे। स्थिति से परेशान होकर परिवार ने निजी वाहन की व्यवस्था की और शव को पोस्टमार्टम हाउस ले जाना पड़ा।

व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

मामले को लेकर जब पीड़ित परिवार, शव वाहन चालक रूपेश रजक और अस्पताल प्रबंधक सुरेंद्र सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने अपनी-अपनी ओर से मामले की जानकारी दी। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब जिला अस्पताल में दो शव वाहन और तीन पायलट की व्यवस्था है, तो जरूरत के समय मृतक के परिजनों को समय पर वाहन क्यों नहीं मिल पाया?

क्या मामले में सूचना के स्तर पर चूक हुई या शव वाहन के संचालन में लापरवाही बरती गई? बारिश में दो घंटे तक शव वाहन का इंतजार करने के बाद निजी वाहन से शव ले जाने की स्थिति ने व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन या स्वास्थ्य विभाग इस मामले की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।

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