तृतीय दिवस की कथा में ब्रह्मा जी के द्वारा नारद जी को बेर लिंग की महिमा का गायन किया गया – पंडित श्री पंकज कृष्ण शास्त्री जी..

दमोह। महाशिवपुराण की कथा के तृतीय दिन आज की कथा में भगवान महादेव से प्रकट प्रणव (ओंकार) का निरूपण तथा सभी अक्षर स्वर व्यंजन के रूप में चारों वेदों का प्राकट्य भगवान महादेव के मुखारविंद से हुआ। माता सती का जन्म शिवा पारंबा दुर्गा शक्ति के रूप में दक्ष के घर पर जन्म हुआ आज की कथा में शिव महापुराण की कथा कहती है देवर्षिनारद जी के ही श्राप के कारण भगवान श्री रामचंद्र महाप्रभु का अवतार दशरथ जी के यहां हुआ एवं सृष्टि प्रकरण में भगवान भोलेनाथ सदाशिव से विष्णु ब्रह्मा रुद्र आदि प्रजापतियों का आविर्भाव (अवतार) हुआ आज की कथा में ब्रह्मा जी द्वारा नारद जी को बेर लिंग की महिमा का गान किया गया ब्रह्मा जी, देव ऋषि नारद से कहते हैं कि जो भी बेर लिंग की उपासना पूजा आदि करते हैं उन पर भगवान महादेव प्रसन्न होकर सभी कामनाओं को सिद्ध कर मोक्ष की प्राप्ति करते हैं। ब्रह्मा जी पर प्रसन्न होकर भगवान सदाशिव ने शिवरात्रि का निरूपण किया। वहीं चतुर्थ दिवस की कथा में शिव जी के द्वारा कामदेव को भस्म करना माता सती से भगवान शिव का विवाह माता सती द्वारा भगवान राम की परीक्षा तथा शिव द्वारा सती त्याग सती का दक्ष के यज्ञ में जाकर भस्म होना वीरभद्र के द्वारा यज्ञ विध्वंस करना और भगवान शिव पार्वती विवाह चौथे दिवस की कथा में बताया जाएगा। तीसरे दिन महाशिवपुराण कि कथा में श्रद्धालु जन बड़ी मात्रा में सुनने के लिए पहुंचे। सभी श्रद्धालुओं ने कथा सुनने का लाभ अर्जित किया।



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