रीढ़ से जुड़े जन्मजात दोष से सिदार्थ रैकवार को मिली मुक्ति
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का मिला सहारा..
दमोह : दमोह जिले से 26 कि.मी. दूर ग्राम धमारा ब्लाक हिण्डोरिया में रहने वाले सोनीलाल रैकवार के परिवार की कहानी है। सोनीलाल का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते है। कोविड काल वर्ष 2020 में जन्मे सिदार्थ के पीठ पर एक बहुत बढ़ा फोड़ा दिखाई दे रहा था। जिससे डिलेवरी के पश्चात इमरजेंसी में डीईआईसी, एसएनसीयू रेफर किया गया जहां बच्चा 12 दिन भर्ती रहा। इसके पश्चात डॉ. जलज बजाज शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा बच्चे को डिस्चार्ज कर निरंतर आरबीएसके एएमओ व डीईआईसी की निगरानी में नियमित फॉलोअप कराते हुये दो वर्ष बाद सर्जरी हेतु लाने की सलाह दी गई। दो वर्ष बाद डॉ. नेहा गौतम आरबीएसके मेडिकल आफिसर ग्राम धमारा पहुचीं जहां बच्चे का फॉलोअप लेते हुये अब सर्जरी की बात कही। दूसरे ही दिन पिता सोनीलाल व मॉ प्रीति बच्चे को लेकर डीईआईसी आये जहां उन्हें मेडिकल कॉलेज जबलपुर के डॉ. विकेष अग्रवाल एवं अभिषेक तिवारी से समन्वय स्थापित कर बच्चे को अगस्त 2024 में सर्जरी हेतु भेजा।
मेडिकल कॉलेज विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा रीढ़ से जुड़े जन्मजात दोष की सफलता पूर्वक सर्जरी कर 3 दिन पश्चात डिस्चार्ज कर दिया। आरबीएसके नियमित फॉलोअप हेतु डॉ. नेहा गौतम पुनः धमारा ग्राम के ऑगनवाड़ी केन्द्र पर बच्चों की स्क्रीनिंग करने पहुचीं तो उनके पिता सोनीलाल रैकवार ने डॉ. नेहा गौतम का स्वागत करते हेतु आरबीएसके-डीईआईसी से मैनेजर नरेश राठौर, नवप्रकाश जैन, व शुभम राठौर को बच्चे की निःशुल्क सर्जरी कराने सहयोग करने पर पर धन्यवाद देते हुये कहां कि मेरे बच्चे को नया जीवन मिला है।


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