मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्नेहा सिंह का जिला जेल दमोह का आकस्मिक निरीक्षण, बंदियों से ली विधिक समस्याओं की जानकारी..
दमोह – 30 मई 2025 (शुक्रवार)।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) श्रीमती स्नेहा सिंह ने आज जिला जेल दमोह का आकस्मिक भ्रमण कर जेल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उनके साथ जेल अधीक्षक श्री सी.एल. प्रजापति सहित अन्य जेल स्टाफ भी मौजूद रहा। इस निरीक्षण का उद्देश्य जेल में निवासरत बंदियों की स्थिति, सुविधाएं एवं प्रशासनिक व्यवस्था का प्रत्यक्ष अवलोकन करना था।

निरीक्षण के दौरान सीजेएम श्रीमती सिंह ने महिला एवं पुरुष बैरकों का विस्तार से जायजा लिया। उन्होंने प्रत्येक बैरक में रह रहे बंदियों से बातचीत कर उनके प्रकरणों की स्थिति, न्यायालयीन कार्यवाही की प्रगति और उनकी विधिक समस्याओं की जानकारी प्राप्त की।
बंदियों से सीधा संवाद
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बंदियों से यह भी पूछा कि क्या उन्हें अदालत में समय पर पेश किया जा रहा है, क्या उन्हें अपने मामलों की जानकारी दी जाती है, और क्या उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध हो रही है। कई बंदियों ने अपनी समस्याएं सामने रखीं, जिनमें कानूनी सलाह की कमी, धीमी न्यायिक प्रक्रिया और नियमित सुनवाई न होने जैसी बातें शामिल रहीं।

भोजन की गुणवत्ता की जांच
निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल की पाकशाला (रसोईघर) का भी निरीक्षण किया। उन्होंने भोजन बनाने की प्रक्रिया देखी और बंदियों को परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता की भी जांच की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भोजन स्वच्छ और पौष्टिक हो, ताकि बंदियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

जेल की दिनचर्या का अवलोकन
जेल अधीक्षक श्री सी.एल. प्रजापति ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को जेल की दैनिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी, जिसमें बंदियों के लिए चलाए जा रहे पुनर्वास कार्यक्रम, शिक्षा एवं प्रशिक्षण गतिविधियाँ, चिकित्सा सुविधाएं और जेल की सुरक्षा व्यवस्था शामिल रही।

प्रशंसा और निर्देश
निरीक्षण के उपरांत सीजेएम श्रीमती स्नेहा सिंह ने जेल प्रशासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं की सराहना की, साथ ही कुछ आवश्यक सुधारों को लेकर निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि “बंदियों को भी एक संवेदनशील और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए ताकि वे सुधार की दिशा में आगे बढ़ सकें।” उन्होंने जेल स्टाफ को निष्पक्षता, मानवता और कानून सम्मत व्यवहार बनाए रखने की हिदायत दी।
मानवाधिकार और न्याय प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने यह भी स्पष्ट किया कि जेलों का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि बंदियों का पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में उनकी वापसी सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से जेल में नियमित विधिक सहायता शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का यह औचक निरीक्षण न केवल जेल प्रशासन की जवाबदेही को सुनिश्चित करता है, बल्कि बंदियों को भी यह विश्वास दिलाता है कि उनकी समस्याओं को सुना और समझा जा रहा है। ऐसे निरीक्षणों से न्याय प्रणाली की पारदर्शिता और मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।



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