सरपंच-सचिव की मिलीभगत से उजागर हुआ मनरेगा में भ्रष्टाचार..

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सरपंच-सचिव की मिलीभगत से उजागर हुआ मनरेगा में भ्रष्टाचार, मासूम बच्चों और बुजुर्गों को बना दिया मजदूर

दमोह। जबेरा/नोहटा
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगारों को साल में 100 दिन रोजगार देने का वादा करती है, लेकिन जबेरा जनपद की ग्राम पंचायत डेलनखेड़ा और सुरई में इसका क्रियान्वयन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। सरपंच और सचिव की लीपापोती से मनरेगा योजना में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है।

ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार डेलनखेड़ा पंचायत में 605 और सुरई पंचायत में 360 मजदूर पंजीकृत हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मजदूरों को नियमित काम नहीं मिल रहा और उनके नाम पर बनाए गए मस्टर रोल पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं।

फर्जी मस्टर रोल, फर्जी भुगतान
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने मासूम बच्चों, बुजुर्गों और ऐसे व्यक्तियों के नाम पर मस्टर रोल बनवाए हैं जो कभी कार्यस्थल पर नहीं गए। उनके खातों में मजदूरी की राशि भेजी जाती है, लेकिन फिर यह पैसा उनसे जबरन वसूला जाता है। मजदूरों ने बताया कि उन्हें खुद सरपंच या सचिव को यह पैसा लौटाना पड़ता है।

पलायन को मजबूर मजदूर
स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने और भ्रष्टाचार के कारण कई ग्रामीण आज भी रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। यह स्थिति शासन की योजनाओं की साख पर सवाल खड़ा करती है।

प्रशासन बेखबर, अधिकारी चुप
जबेरा जनपद के सीईओ को कॉल किया गया लेकिन उनका फोन पहले बिजी रहा, फिर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। मनरेगा के एपीओ पुष्पेंद्र पटेल से भी संपर्क नहीं हो सका। वहीं पंचायत के इंजीनियर राजकरण वर्मा का कहना है, “आपके माध्यम से जानकारी मिली है, अगर मौके पर जांच में लापरवाही पाई गई तो कार्यवाही की जाएगी।”

जरूरत है निष्पक्ष जांच की
मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना में इस प्रकार की गड़बड़ी न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग है, बल्कि यह ग्रामीणों के अधिकारों का सीधा हनन है। शासन और प्रशासन को चाहिए कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मनरेगा गरीबों के लिए एक भरोसेमंद योजना बनी रह सके।

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