हिंदू समाज पर उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर विहिप ने जताई आपत्ति, कहा – सवर्ण-शूद्र की बात हिंदू एकता को तोड़ने का प्रयास..

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हिंदू समाज पर उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर विहिप ने जताई आपत्ति, कहा – सवर्ण-शूद्र की बात हिंदू एकता को तोड़ने का प्रयास..

जबलपुर/दमोह | हाल ही में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा पारित एक निर्णय में प्रयुक्त “सवर्ण” एवं “शूद्र” जैसे शब्दों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कड़ा ऐतराज़ जताया है। परिषद का कहना है कि यह टिप्पणी हिंदू समाज की एकता को खंडित करने वाली और गैरवाजिब है।विश्व हिंदू परिषद के महाकौशल प्रांत के प्रांत मंत्री उमेश माधव मिश्र ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि विहिप विगत कई दशकों से समग्र हिंदू समाज को एकजुट करने, सेवा, सुरक्षा और स्वाभिमान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हिंदू समाज में किसी प्रकार का ऊँच-नीच, जातीय भेद या भाषा, प्रांत आधारित विभाजन नहीं है, और इस भाव के साथ परिषद न केवल भारत में, बल्कि विश्वभर में कार्य कर रही है।मिश्र ने कहा कि हाल ही में माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा एक मामले के संदर्भ में जिला न्यायालय को “शूद्र” और उच्च न्यायालय को “सवर्ण” जैसा उल्लेख करते हुए जो तुलना की गई, वह न केवल अनुचित है, बल्कि इससे सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंच सकता है। परिषद का मत है कि न्यायिक संस्थाओं के आंतरिक व्यवहार को जातीय संदर्भों में बांधना पूरी तरह अनुपयुक्त और वर्तमान संदर्भ में अप्रासंगिक है।विहिप ने स्पष्ट किया कि –> “हिन्दवाः सोदरः सर्वे, न हिंदू पतितो भवेत्, मम दीक्षा हिंदू रक्षा, मम मंत्र समानता।”यह मंत्र न केवल संगठन की दिशा है, बल्कि समाज को जोड़ने का मूल संदेश भी है।विहिप का यह भी कहना है कि सवर्ण-शूद्र जैसी शब्दावली, जो अतीत की एक कमजोर कड़ी रही है, उसे आज दोहराना सामाजिक समरसता के विपरीत है। आज का हिंदू समाज एक नए आत्मविश्वास और समरसता की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण की दिशा में अग्रसर है।प्रचार-प्रसार प्रमुख अनुपम गुप्ता द्वारा जारी इस बयान में मांग की गई है कि माननीय न्यायालय को ऐसी असंवेदनशील और विभाजनकारी टिप्पणियों से परहेज करना चाहिए, जिससे हिंदू समाज की भावनाएं आहत होती हों।—यदि आप चाहें तो इसमें स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया या कानूनी विशेषज्ञों की राय भी जोड़ सकते हैं।

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