दमोह जिला अस्पताल की अव्यवस्था: डिस्चार्ज के 7 घंटे बाद भी नहीं मिली ‘जननी’ एंबुलेंस, पिता परेशान..
दमोह: जिला अस्पताल में प्रसूता महिलाओं को मिलने वाली जननी एक्सप्रेस सेवा की पोल खुल गई है। डिलीवरी के बाद डिस्चार्ज हुई एक महिला को उसके गाँव तक छोड़ने के लिए एंबुलेंस दोपहर से लेकर देर शाम तक नहीं मिल पाई, जिससे उसका पति एंबुलेंस के लिए भटकता रहा।

घंटों इंतज़ार, सुविधा के नाम पर निराशा
हटा ब्लॉक के ग्राम देवरा जामसा निवासी वीरेंद्र पटेल ने बताया कि उनकी बेटी को 27 अक्टूबर को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उसकी डिलीवरी हुई। शनिवार को दोपहर 12:45 बजे उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
वीरेंद्र पटेल ने आरोप लगाया कि डिस्चार्ज होने के बाद से उन्होंने 108 और जननी एंबुलेंस के लिए सैकड़ों बार फोन लगाए, लेकिन पाँच से दस मिनट का आश्वासन मिलते-मिलते शाम के 6 बजे तक पहुँच गई और एंबुलेंस नहीं आई। इस कारण वह अपनी बेटी और नवजात को गाँव नहीं ले जा पाए।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब शासन गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस से निशुल्क घर तक पहुँचाने की सुविधा देता है, तो जिला अस्पताल में यह व्यवस्था क्यों उपलब्ध नहीं है।
सिविल सर्जन के हस्तक्षेप से मिली राहत
जब बच्ची के पिता वीरेंद्र पटेल ने हार मानकर सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल से संपर्क किया, तब जाकर स्थिति सुधरी।
सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल के कॉल करने के बाद ही बच्ची के पिता को जननी एंबुलेंस उपलब्ध हो सकी।
सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल ने इस संबंध में कहा है कि जगह-जगह हेल्पडेस्क बनाए गए हैं और नंबर भी उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि आवश्यकता पड़ने पर इन नंबरों पर कॉल करके सहायता उपलब्ध की जा सकती है। हालांकि, यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े करती है।



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