बुन्देलखण्ड की सिनेमेटिक लोकेशंस की खोज शुरू.. फिल्म जगत के विशेषज्ञों का दल भ्रमण पर रवाना..

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बुन्देलखण्ड की सिनेमेटिक लोकेशंस की खोज शुरू..

 फिल्म जगत के विशेषज्ञों का दल भ्रमण पर रवाना..

बुन्देलखण्ड में फिल्म पर्यटन के एक नए युग की शुरुआत होगी..

दमोह : 

            मध्यप्रदेश शासन की फिल्म पर्यटन नीति 2025 को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से आयोजित “बुन्देलखण्ड फिल्म फेस्टिवल एवं फिल्म पर्यटन समागम 2026” अपने प्रथम चरण में प्रवेश कर चुका है। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश के मार्गदर्शन में आयोजित इस समागम के तहत आज फिल्म जगत के विशेषज्ञों, बॉलीवुड लाइन प्रोड्यूसर्स और आयोजन समिति के पदाधिकारियों का दल जिले के चिन्हित पर्यटन स्थलों के भ्रमण हेतु रवाना हुआ।

लोकेशन पहचान और फिल्म पर्यटन पर जोर

            कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार, यह भ्रमण दल दमोह और आसपास की लगभग 35 भव्य ऐतिहासिक धरोहरों, रमणीक स्थानों और धार्मिक स्थलों का अवलोकन करेगा। इस दल में बॉलीवुड से आए लगभग 20 अनुभवी लाइन प्रोड्यूसर और फिल्म निर्माता शामिल हैं, जो इन स्थानों को फिल्म फिल्मांकन (शूटिंग) की दृष्टि से परखेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दमोह को एक उभरते हुए फिल्म टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना है ताकि भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के निर्माता यहाँ शूटिंग के लिए आकर्षित हों।

बुन्देली संस्कृति को मिलेगी नई पहचान

            बुन्देलखण्ड कला संस्कृति मंच समिति, छतरपुर द्वारा आयोजित इस समागम के माध्यम से क्षेत्र की लोक संगीत, नृत्य और ग्रामीण परंपराओं को फिल्म इंडस्ट्री से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान विशेषज्ञ दल स्थानीय मानव संसाधन, लॉजिस्टिक सपोर्ट और कलाकारों की उपलब्धता का भी जायजा लेगा।

भ्रमण दल में शामिल प्रमुख सदस्य

            इस महत्वपूर्ण भ्रमण में बुन्देलखण्ड कला संस्कृति मंच समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी और दमोह की स्थानीय टीम के सदस्य संयुक्त रूप से शामिल रहे। दल में फिल्म जगत के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ मंच के सदस्य और दमोह टीम के ऊर्जावान कार्यकर्ता स्थानीय गाइड की भूमिका निभा रहे हैं। यह संयुक्त टीम समन्वय के साथ उन स्थानों का चयन कर रही है, जहाँ भविष्य में बड़ी फिल्मों और वेबसीरीज की शूटिंग की जा सके।

पर्यटन विभाग के मार्गदर्शन में ‘रेकी’ कार्य

            मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की फिल्म नीति को ध्यान में रखते हुए, विभाग के विशेषज्ञ (आरिफ खान एवं अन्य) इन स्थलों की तकनीकी व्यवहार्यता की जांच कर रहे हैं। दल द्वारा दमोह के लगभग 35 चिन्हित स्थानों, जिनमें प्राचीन मंदिर, प्राकृतिक जलप्रपात और ऐतिहासिक किले शामिल हैं, का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया जा रहा है।

स्थानीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका

            दमोह टीम के सदस्य भ्रमण दल को जिले के उन ‘अनछुए’ स्थानों तक ले जा रहे हैं, जो सिनेमेटिक दृष्टि से बेहद खूबसूरत हैं। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि स्थानीय टीम के सहयोग से ही इन लोकेशंस की ऐतिहासिक जानकारी और वहां पहुँचने के सुगम रास्तों की पहचान की जा रही है।

अगला चरण

            10 और 11 जनवरी को मुख्य समारोह आयोजित होगा। इस समारोह में देशभर से आए फिल्म निर्माता इन चिन्हित लोकेशंस की विस्तृत रिपोर्ट और विजुअल्स देखेंगे, जिससे बुन्देलखण्ड में फिल्म पर्यटन के एक नए युग की शुरुआत होगी।

बुन्देलखण्ड फिल्म फेस्टिवल से पहले टीम ने किया जबेरा क्षेत्र का भ्रमण

            10 और 11 जनवरी को आयोजित होने वाले बुन्देलखण्ड फिल्म फेस्टिवल की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी क्रम में फिल्म निर्माण से जुड़े प्रोड्यूसर, लाइन प्रोड्यूसर, कलाकारों एवं तकनीकी टीम के सदस्यों ने दमोह जिले के जबेरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पड़रिया धोबन, सिंगौरगढ़ किला, नजारा पॉइंट, पर्यटन ग्राम चौरई सहित आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण कर लोकेशन भ्रमण किया।

            भ्रमण के दौरान रजत दुबे (लाइट प्रोड्यूसर, इंदौर), पिंटू शर्मा (लाइन प्रोड्यूसर और अभिनेता जबलपुर), राजेंद्र सोनी (असिस्टेंट लाइन प्रोड्यूसर, भोपाल), राजीव कुशवाहा (डीओपी, भोपाल), राम कोचे (असिस्टेंट डीओपी, भोपाल), वसीम अली (लाइन प्रोड्यूसर, भोपाल), हर्ष दवे (लाइन प्रोड्यूसर, इंदौर) के साथ राइटर-डायरेक्टर नारायण चौहान, आसिफ मस्तान, नवीन जैन, महक, अमरदीप जैन, अखिलेश गोस्वामी सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

            टीम ने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों और फिल्मांकन की अनुकूल परिस्थितियों का जायजा लिया। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता और लेखक आरिफ शहडोली ने बताया कि वे यहां के फिल्म मित्रों और स्थानीय सहयोग से बेहद प्रभावित हैं। लोकेशन बेहतर हैं और वातावरण मित्रवत है। उन्होंने कहा कि यदि इन्हें और सुव्यवस्थित करने का अवसर मिले तो यह क्षेत्र फिल्म निर्माण के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है। पिंटू शर्मा ने बताया कि वे दक्षिण भारत में काम कर चुके है और यहां की लोकेशन दक्षिण भारत को पहुंचाएंगे जिससे वे भी यहां आ सकें।

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