यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का बड़ा एलान..

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यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का बड़ा एलान..
1 फरवरी को दमोह पूरी तरह बंद, शिक्षा बचाने सड़क पर उतरेगा समाज….
केंद्र सरकार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष की चेतावनी…
दमोह।
केंद्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के माध्यम से थोपे गए नए शिक्षा नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज ने आर-पार की लड़ाई का एलान कर दिया है। समाज ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि सरकार ने यूजीसी के नए कानून को तत्काल वापस नहीं लिया, तो यह आंदोलन और भी व्यापक एवं उग्र रूप लेगा। इसी कड़ी में रविवार 1 फरवरी को दमोह शहर पूर्णतः बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
सवर्ण समाज के नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था के साथ खतरनाक प्रयोग कर रही है, जिसका सीधा और गंभीर नुकसान सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा। समाज के प्रमुख प्रतिनिधि मनीष राजोरिया और मनोज देवलिया ने कहा कि अभी यह नियम उच्च शिक्षा पर लागू किए गए हैं, लेकिन सरकार की मंशा इन्हें आगे चलकर स्कूली शिक्षा में लागू करने की है, जिससे सवर्ण वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा के दरवाजे धीरे-धीरे बंद होते चले जाएंगे।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह लड़ाई किसी एक समाज की नहीं, बल्कि योग्यता, समान अवसर और देश के शैक्षणिक भविष्य को बचाने की लड़ाई है। सवर्ण समाज ने दमोह के सभी व्यापारियों, सामाजिक संगठनों, अभिभावकों और जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर इस ऐतिहासिक बंद को सफल बनाएं और सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ खुलकर खड़े हों।
दोपहर 12 बजे होगा शक्ति प्रदर्शन
समाज द्वारा जानकारी दी गई कि रविवार दोपहर 12 बजे अस्पताल चौराहा पर सवर्ण समाज के हजारों लोग एकत्रित होंगे। इसके बाद एक विशाल रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा और कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम कड़ा विरोध ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन में यूजीसी के नए नियमों को तत्काल रद्द करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल रहेगी।
आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
सवर्ण समाज ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मांग को नजरअंदाज किया, तो यह आंदोलन केवल दमोह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक फैलाया जाएगा। समाज ने कहा कि अब चुप बैठने का समय नहीं है और शिक्षा के नाम पर हो रहे अन्याय के खिलाफ हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।
समाज ने सभी वर्गों से अपील की है कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इस आंदोलन का हिस्सा बनें और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने के लिए एकजुट होकर सरकार को चेतावनी दें।

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