दमोह में लोधी समाज और ओबीसी महासभा का उग्र प्रदर्शन: बैरिकेड तोड़े, पुलिसकर्मी घायल, पत्रकारों से मारपीट; न्याय की मांग के बीच राजनीतिक सवाल भी उठे..
दमोह।
महेन्द्र सिंह लोधी की आत्महत्या के विरोध में बुधवार को दमोह जिला मुख्यालय पर बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। लोधी समाज और ओबीसी महासभा के बैनर तले निकाली गई अस्थि यात्रा कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। बैरिकेड तोड़कर परिसर में प्रवेश, पुलिस से झड़प, पुलिसकर्मियों के घायल होने और पत्रकारों के साथ मारपीट की घटनाओं ने पूरे मामले को विवादों के केंद्र में ला दिया है।
अस्थि यात्रा से कलेक्ट्रेट तक पहुंचा आक्रोश..
पन्ना जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र निवासी महेन्द्र सिंह लोधी द्वारा कथित रूप से आत्महत्या किए जाने के बाद परिजनों ने प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि रनेह क्षेत्र में पूर्व में हुई मारपीट और मानसिक दबाव के चलते महेन्द्र ने यह कदम उठाया। इसी मामले में न्याय की मांग को लेकर मृतक की अस्थियां लेकर बड़ी संख्या में लोग दमोह कलेक्ट्रेट पहुंचे।
मुख्य द्वार के सामने प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए नर्स नीलिमा यादव के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की।

बैरिकेड तोड़े, पुलिस से झड़प..
स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस ने कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर बैरिकेडिंग की थी। लेकिन प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने बैरिकेड हटाकर अंदर प्रवेश कर लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हंगामे में ड्यूटी पर तैनात कुछ पुलिसकर्मी घायल भी हुए।
हालांकि बाद में मृतक के परिजन और कुछ लोग कलेक्ट्रेट परिसर में शांतिपूर्वक धरने पर बैठ गए।

कलेक्टर कक्ष का गेट बंद, मीडिया को भी रोका गया..
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए कलेक्टर कक्ष की ओर जाने वाले गेट बंद कर दिए गए। प्रदर्शनकारियों को अंदर प्रवेश से रोक दिया गया। इस दौरान कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों को भी भीतर जाने से रोका गया, जिससे मीडिया कर्मियों में नाराजगी फैल गई।
शाम 6 बजे पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही विरोध प्रदर्शन किया और कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को बाहर बुलाने की मांग की। जब कलेक्टर मौके पर नहीं पहुंचे तो पत्रकारों ने 13 फरवरी को नोहटा में आयोजित नोहलेश्वर महोत्सव में शामिल होने आ रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम की मीडिया कवरेज का सामूहिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया।
पत्रकारों से मारपीट, एफआईआर दर्ज..
मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों के अनुसार, भीड़ में शामिल कुछ चिन्हित व्यक्तियों ने पत्रकारों से बहस की, जो बाद में मारपीट में बदल गई। दो पत्रकारों के साथ अभद्रता और हाथापाई की घटना सामने आई है।
घटना के बाद पत्रकारों ने नामजद आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर से की गई, जिसके बाद दमोह सिटी कोतवाली में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

न्याय की मांग या राजनीतिक मंच?
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआत में मृतक को न्याय दिलाने के लिए शांतिपूर्ण बताए जा रहे प्रदर्शन ने अचानक उग्र रूप क्यों लिया? क्या यह आंदोलन पूरी तरह पीड़ित परिवार की न्याय की मांग पर केंद्रित था, या कुछ तत्वों ने इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की?
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान पीड़ित पक्ष और भीड़ के बीच समन्वय स्पष्ट नहीं दिखा। वहीं, प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रहा है।
आगे क्या ?
अब निगाहें प्रशासनिक जांच और पुलिस कार्रवाई पर टिकी हैं। एक ओर पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर पत्रकारों पर हमले की घटना ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा के सवाल भी खड़े कर दिए हैं।



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