बीच नदी से हो रहा अवैध मुरम उत्खनन, उसी मुरम से बन रही प्रधानमंत्री सड़क..
पथरिया क्षेत्र में खनिज विभाग की अनदेखी, किसानों के पेड़ भी बिना अनुमति काटे गए..
दमोह। जिले के पथरिया ब्लॉक में अवैध मुरम उत्खनन का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि खनिज विभाग की अनदेखी और कथित संरक्षण के चलते कोपरा नदी के बीचों-बीच से बड़े पैमाने पर अवैध मुरम निकाली जा रही है और उसी मुरम का उपयोग खैजराकला से बरीघाट तक बनाई जा रही प्रधानमंत्री सड़क के निर्माण में किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों घनमीटर मुरम का अवैध उत्खनन किया जा चुका है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए है।
जानकारी के अनुसार पथरिया क्षेत्र में इन दिनों सड़क निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। सड़क निर्माण में उपयोग की जा रही मुरम को कोपरा नदी से मशीनों के माध्यम से निकाला जा रहा है। नदी के भीतर कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। नियमों के अनुसार किसी भी नदी के बीच से खनिज उत्खनन करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन इसके बावजूद खुलेआम उत्खनन जारी है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में मुरम माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई का डर नहीं रह गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन-रात ट्रैक्टर और डंपरों से मुरम निकाली जा रही है और लगातार सड़क निर्माण स्थल तक पहुंचाई जा रही है।
किसान के खेत से उखाड़ दिए आम के पेड़..
सड़क निर्माण कार्य के दौरान किसानों की जमीन और पेड़ों को भी नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। ग्राम निवासी किसान घनश्याम अहिरवार ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण कर रहे ठेकेदार ने उनके खेत में लगे पांच आम के पेड़ों को उखाड़कर फेंक दिया। इसके बाद वहां मुरम डालकर सड़क निर्माण कर दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार गर्मी के मौसम में आम के पेड़ किसानों की आय का बड़ा साधन होते हैं। नियमों के तहत किसी भी पेड़ को काटने या उखाड़ने से पहले वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई।
खनिज विभाग पर उठ रहे सवाल..
ग्रामीणों का आरोप है कि कोपरा नदी में चल रहे अवैध उत्खनन की शिकायत लगातार खनिज विभाग को दी जा रही है। खनिज अधिकारी राजेंद्र कमलेश सहित विभागीय इंस्पेक्टरों को भी मामले की जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो नदी का स्वरूप बिगड़ सकता है और बरसात के दौरान आसपास के क्षेत्रों में कटाव और जल संकट जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
वहीं जब इस संबंध में खनिज विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो खनिज अधिकारी, सहायक खनिज अधिकारी और इंस्पेक्टरों द्वारा फोन रिसीव नहीं किए गए। इससे स्थानीय लोगों में यह चर्चा तेज हो गई है कि सड़क निर्माण कर रहे ठेकेदार को विभागीय स्तर पर खुली छूट दी गई है।
पर्यावरण को भी खतरा..
विशेषज्ञों के अनुसार नदी के भीतर अवैध उत्खनन से जलस्तर प्रभावित होता है। इससे नदी की प्राकृतिक संरचना बिगड़ने के साथ-साथ आसपास के खेतों और जल स्रोतों पर भी असर पड़ता है। दूसरी ओर बिना अनुमति पेड़ों की कटाई पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और अवैध उत्खनन के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।



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