मासूम की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट: सल्फास के उपयोग में बरतें सावधानी, लापरवाही बन सकती है जानलेवा..
दमोह। जिले के हिण्डोरिया थाना क्षेत्र के ग्राम आनु में हुई दर्दनाक घटना ने अनाज भंडारण में उपयोग होने वाली जहरीली दवा सल्फास (एल्यूमिनियम फॉस्फाइड) के खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। दवा युक्त गेहूं की दुर्गंध से चार बच्चों की तबीयत बिगड़ने और एक 5 वर्षीय मासूम की मौत के बाद जिला प्रशासन ने आमजन और किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है।
जानकारी के अनुसार ग्राम आनु निवासी माखन प्रजापति के चार बच्चे धर्मेंद्र (5 वर्ष), रीना (3 वर्ष), दिनेश (7 वर्ष) और दीपक (9 वर्ष) एक कमरे में सो रहे थे। उसी कमरे में सल्फास युक्त गेहूं रखा हुआ था। परिजनों के मुताबिक रात के दौरान बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल दमोह लाया गया, जहां चिकित्सकों ने धर्मेंद्र को मृत घोषित कर दिया, जबकि तीन अन्य बच्चों का उपचार जारी है।
घटना के बाद कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सल्फास के उपयोग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत विषैला रसायन है, जिसका उपयोग केवल निर्धारित मानकों और सुरक्षा उपायों के तहत ही किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सामान्यतः एक छोटा पाउच एक क्विंटल अनाज के लिए पर्याप्त होता है, लेकिन कई बार लोग आवश्यकता से अधिक मात्रा में इसका उपयोग कर देते हैं, जिससे अत्यधिक फॉस्फीन गैस निकलती है।
कलेक्टर श्री यादव ने कहा कि फॉस्फीन गैस मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है और अधिक मात्रा में इसके संपर्क में आने से मृत्यु तक हो सकती है। उन्होंने किसानों और भंडारणकर्ताओं से अपील की कि सल्फास को बच्चों की पहुंच से दूर रखें तथा इसके उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।
उपसंचालक कृषि जे.एल. प्रजापति ने बताया कि सल्फास (एल्यूमिनियम फॉस्फाइड) के उपयोग को लेकर विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुसार दवा का उपयोग केवल प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा ही किया जाना चाहिए। उपयोग के दौरान दस्ताने, मास्क, सुरक्षात्मक चश्मा और सुरक्षा उपकरण पहनना अनिवार्य है। फ्यूमिगेशन के समय गोदाम और अनाज के भंडारण स्थल को पूरी तरह सील किया जाना चाहिए ताकि विषैली गैस बाहर न निकल सके।
उन्होंने बताया कि सल्फास नमी के संपर्क में आते ही अत्यंत जहरीली फॉस्फीन गैस उत्पन्न करता है। इसलिए इसे सूखी और सुरक्षित जगह पर रखा जाना चाहिए। दवा को भोजन सामग्री, पशुचारे और पेयजल से अलग सुरक्षित स्थान पर संग्रहित किया जाए। निर्धारित मात्रा से अधिक उपयोग नहीं किया जाना चाहिए और प्रतिबंधित टेबलेट का उपयोग पूरी तरह वर्जित है।
कृषि विभाग ने यह भी सलाह दी है कि फ्यूमिगेशन के बाद गोदाम को पर्याप्त समय तक खुला रखा जाए ताकि गैस पूरी तरह बाहर निकल सके। यदि किसी व्यक्ति में सिरदर्द, चक्कर आना, सांस लेने में परेशानी या विषाक्तता के अन्य लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता प्राप्त की जाए।
प्रशासन ने किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में नीम तेल और नीम की पत्तियों जैसे जैविक उपाय अपनाने की सलाह भी दी है। साथ ही जिस स्थान पर धूम्रक कीटनाशकों का उपयोग किया गया हो, वहां बच्चों, पशुओं और अन्य व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रखने को कहा गया है।
ग्राम आनु की यह दुखद घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि पूरे जिले के लिए चेतावनी भी है कि अनाज संरक्षण में उपयोग होने वाले रसायनों का प्रयोग अत्यधिक सावधानी और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि सुरक्षा मानकों का पालन कर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में सहयोग करें।यह खबर घटना और प्रशासन की एडवाइजरी को जोड़ते हुए संतुलित एवं विस्तृत रूप में तैयार की गई है।



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