दमोह – शहर में नाग पंचमी पर्व के दिन वन विभाग ने ऐसे सपेरों को पकड़ा , जो इन सांपों को क्रूरता पूर्वक टोकनी में रखकर लोगों के घरों पर जा रहे थे. सूचना मिलने के बाद वन अमला पहुंचा और दस से अधिक सपेरों के पास से इन सापों को मुक्त कराकर जंगल में छोड़ा और सपेरों को समझाइश दी गई। बता दें नाग पंचमी पर सांपों को इस तरह से लेकर घूमना प्रतिबंधित है। इसके बाद भी सपेरे नहीं मानते और चोरी छिपे सांपों को जंगल से पकड़कर उनके साथ क्रूरता करते हुए टोकनी में रख लेते हैं और घरों में जाकर लोगों से दूध पिलाते हैं. साथ ही कई प्रकार से सांप के साथ क्रूर व्यवहार करते हैं।
शुक्रवार को इसी तरह के कई सपेरे शहर में घूम रहे थे जिसकी जानकारी हमारे दमोह नाम से बने एक ग्रुप को लगी , टीम में नेतृत्व कर्ता एनीमल राइट्स एक्टिविस्ट प्रांशुल पारोचे , स्वेता श्रीवास्तव , हर्षवर्धन नेमा ने जानकारी जुटाई और वन विभाग को सूचित किया। किल्लाई नाके पर दस से अधिक सपेरों को पकड़ा और उसके बाद उन्हें रेंज कार्यालय लाया गया , कई सपेरों ने सांप के मुंह को सिल दिया था किसी ने दांत तोड़ दिए थे और सांप की विष ग्रंथि को गर्म लोहे के सरिया से जलाया गया था , ताकि लोगों के स्पर्श करते समय वह हमला ना करें।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत यह कानूनी अपराध है. नाग पंचमी पर सांपों की पूजा करना हमारे धर्म में उन्हें संरक्षित करने के लिए है ना कि उनके साथ इस तरह की क्रूरता करने के लिए. वन विभाग की टीम ने सपेरो से पूछताछ की उन्हे हिदायत देकर जाने दिया और सभी सांपों को जंगल में छोड़ दिया गया.
इस दौरान डीएफओ महेंद्र सिंह उईके ने भी सपेरो से बात की और कहा की अगर ऐसा करोगे तो आगे से नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी कार्यवाई के दौरान रेंजर विक्रम चौधरी , देवेंद्र शुक्ला , लच्छू अहिरवार , दिनेश नेमा मौजूद रहे।


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