उत्साह के साथ मनाया गया आदिम तीर्थकर श्री आदिनाथ भगवान का जन्म जयंती महोत्सव
दमोह- जैन समाज के प्रथम तीर्थंकर 1008 श्री आदिनाथ की जयंती के उपलक्ष्य में आज सभी जैन मंदिरों में उत्साह के साथ जन्मोत्सव मनाया गया।
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म उप्र के अयोध्या नगर में हुआ था, उनके पिता राजा नाभि राय एवं माता रानी मरू देवी थीं। राजा ऋषभ देव के भरत चक्रवर्ती एवं बाहुबली आदि सौ पुत्र और ब्राह्मी एवं सुंदरी नाम की दो बेटियां थी। राज दरबार लगा हुआ था, जिसमें नीलांजना का नृत्य चल रहा था। सभी राजा महाराजा विराजमान थे। नृत्य करते-करते नीलांजना की मृत्यु हो गई। उसी समय राजा ऋषभदेव को वैराग्य आ जाता है और वह अपना पूरा राज पाठ व अपने दोनों बेटों भरत एवं बाहुबली को सौंप कर वन को चले जाते हैं।

जहां वह 6 महीने तक घोर तपस्या करते हैं। उन्हें 6 महीने तक आहार की विधि नहीं मिलती। 1 वर्ष बाद अक्षय तृतीया के दिन उनके आहार होते हैं। राजा श्रेयांश के यहां गन्ने के रस के द्वारा आदिनाथ मुनि के आहार होते हैं। जब भगवान की आयु 14 दिन शेष रहती है वह कैलाश पर्वत पर जाकर माघ कृष्ण चतुर्दशी को आदिनाथ भगवान कैलाश पर्वत उत्तराखंड से मोक्ष चले गए। उनके जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में तभी से जैन समाज द्वारा पूरे भारत में भगवान श्री आदिनाथ जी की जन्म जयंती मनाई जाती है। इस दौरान जैन मंदिरों में सुबह से पूजन अभिषेक सहित धार्मिक अनुष्ठान आयोजित कर प्रत्येक वर्ष धूमधाम से मनाया जाता है इसी क्रम में आज श्री दिगम्बर जैन कांच मन्दिर कमेटी द्वारा पूजन अभिषेक के बाद सभी को फल वितरित कर भगवान आदिनाथ जयंती को उत्साह पूर्वक मनाया गया जिसमें कांच मन्दिर कमेटी अध्यक्ष सतीश जैन कल्लन, उपाध्यक्ष मनोज जैन मीनू, महामंत्री, सोनू जैन नेता, कुंडलपुर कमेटी के मंत्री पदम् जैन खली, महेंद्र पटवारी, राजकुमार जैन सन्मति, गुड्डू जैन, सुधीर जैन, रजनीश जैन,मैनेजर राहुल जैन, सभी महिला मंडल सहित समाज के सभी लोगो की उपस्थिति रही।



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