अपनी ही पार्टी को आईना दिखाना आलोट विधायक को पढ़ा भारी
पार्टी ने अनुशासन हीनता मानते हुए थमाया शोकास नोटिस
दमोह। उज्जैन सिंहस्थ के लिए किसानों की भूमि पर शासन द्वारा पक्के निर्माण करना विधायक मालवीय को नागवारा गुजरा और उन्होंने किसानों के हित में अपनी आवाज को विधानसभा सत्र में बुलंद किया ओर कहा कि सिंहस्थ के लिए किसानों की भूमि को अस्थाई रूप टेंट लगाकर उपयोग किया जाना चाहिए इस समय में दो तीन माह के लिए जमीन अधिग्रहित की जा सकती हे लेकिन सरकार वहां पक्के निर्माण कर रही हे जिससे किसानों में आक्रोश पनप रहा हे उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि कुछ अधिकारी भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार की भ्रमित कर रहे हे वे यही नहीं रुके उन्होंने कहा कि कफ़न के जेब नहीं होते अगर 10 से 20 करोड़ कमा भी लिए तो वे यही समाप्त हो जाएंगे उनसे संतुष्टि नहीं मिलेगी साधु सन्तों ने अपना सर्वस्व त्यागकर वैराग्य ग्रहण किया हे उन्हें किसी चीज की आसक्ति नहीं रहती हे अतः उनको पक्के भवनों में रुकाना
न्यायोचित नहीं हे।

मालवीय के इस बयान पर काग्रेस विधायक महेश परमार ने समर्थन किया वही पार्टी को मालवीय का यह तरीका ठीक नहीं लगा और अपनी ही पार्टी के खिलाफ आवाज उठाना उचित नहीं लगा उनके इस कृत्य से कांग्रेस को बल मिला हे अतः पार्टी प्रदेश कार्यालय से इस मामले को अनुशासन हीनता मानते हुए मालवीय को शोकाश नोटिस भेजकर 7 दिवस में जवाब मांगा हे
मालवीय द्वारा विधानसभा में किसानों की समस्या पर प्रश्न करने पर उज्जैन के किसानों ने इसे सराहा हे ओर उज्जैन पहुंचने पर उनका स्वागत भी किया हे
जहां जावरा में ग्रीन फील्ड की जमीन को लेकर किसान संघर्ष समिति आंदोलित हे किसान नेता राजेश भरावा एवं डी,पी,धाकड़ इस आंदोलन में कूदकर माहौल को गर्मा दिया हे प्रशासन ने आंदोलन को कुचलने के लिए राजेश भरावा एवं डी,पी,धाकड़ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया हे जहां उन्होंने आरोप लगाते हुए सरकार को दमनकारी बताते हुए लोकतंत्र की हत्या करने वाला बताया और बताया कि सरकार अपने बाहुबल से किसानों की आवाज को दबा रही हे इन दोनों नेताओं ने पूर्व में भी किसान आंदोलन को राष्ट्रीय लेवल पर पहचान दिलाई थी वहीं मालवीय के बयान से कांग्रेस को बैठे बिठाए ही बड़ा मुद्दा मिल गया हे वे मोहन सरकार की किसान विरोधी छवि बनाना चाहते हे कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व भी किसानों के हित की आवाज उठाने वाले तथा पैदल चलकर शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले कांग्रेस नेताओं को बेवजह गिरफ्तार कर जेल भेजने पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कार्य कर रहा हे ऐसे में किसानों के हित में उठी यह चिंगारी भविष्य में कोई बड़े आंदोलन का रूप ना ले ले इसके लिए भी सरकार चिंतित हे
ओर इसे डेमेज कंट्रोल करने पर रणनीति बना रही हे ज्ञात हे कि चिंतामन मालवीय ने पूर्व में भी मोहन यादव के विधायक रहते सिंहस्थ क्षेत्र से अपनी भूमि अलग करने के गंभीर आरोप लगाते हुए कार्यवाही की मांग की थी
लेकिन मोहन यादव वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री हे ओर चिंतामन मालवीय आलोट क्षेत्र से विधायक हे ये दिनों नेता उज्जैन के निवासी हे
इन दोनों की गुटीय लड़ाई कही पार्टी को रसातल में ना धकेल दे इसके लिए पार्टी गंभीर हे ओर मालवीय पर कार्यवाही करने के मुड़ में हे
वहीं मालवीय के इस कृत्य ने मोहन सरकार को ललकारने का काम किया हे अब देखना हे मोहन यादव अपनी कूटनीति से इस मुद्दे को कैसे काबू करते हे वहीं मालवीय को भी मोहन यादव से पंगा लेना कही भारी ना पड़ जाए दोनों नेताओं के सह ओर मात के खेल पर किसकी जीत होती हे इस पर सभी की निगाहे लगी हे फिलहाल किसानों के हित में आवाज उठाना पार्टी को गलत लगे लेकिन इससे मालवीय के राजनीतिक कद बढ़ा हे



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