दमोह के मनीष सिंह और दीपेश सेन ने राज्यस्तरीय ताइक्वांडो रेफरी परीक्षा उत्तीर्ण की
दमोह। 18 से 20 अप्रैल तक मध्यप्रदेश ताइक्वांडो संघ द्वारा रतलाम में आयोजित राज्यस्तरीय रेफरी सेमिनार में दमोह शहर के मनीष सिंह (प्रशिक्षक, शासकीय ताइक्वांडो नोडल विद्यालय) और दीपेश सेन ने सहभागिता की। तीन दिवसीय इस सेमिनार में दोनों प्रतिभागियों ने रेफरी की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर दमोह जिले को गौरवान्वित कियज्ञं परीक्षा में अंतरराष्ट्रीय रेफरी सरबजीत सिंह मुख्य निर्णायक की भूमिका में रहे। यह सेमिनार मध्य प्रदेश ताइक्वांडो संघ के अध्यक्ष श्री गौतम लक्षरी एवं कोषाध्यक्ष श्री गगन कुरील की उपस्थिति में संपन्न हुआ। दमोह जिला क्रीड़ा अधिकारी श्री विवेक दत्त शर्मा ने दोनों खिलाड़ियों को इस उपलब्धि पर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह उपलब्धि न केवल दोनों खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण का प्रतीक है, बल्कि यह जिले में ताइक्वांडो जैसे खेल के विकास और लोकप्रियता के लिए एक प्रेरणादायक पहल भी मानी जा रही है।
अनुकंपा नियुक्ति शीघ्र दी जावें- राकेश सिंह हजारी
दमोह। म.प्र.शासकीय लिपिकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश संरक्षक राकेश सिंह हजारी द्वारा म.प्र. शासन् से आपेक्षा की गई है, कि शासकीय कार्य करते समय कर्मचारी की हुई मृत्यु उपरांत संबंधित परिवार के एक व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान किये जाने का प्रावधान है, किन्तु विगत 10 वर्षो से भी अधिक समय से मृत परिवार को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान नहीं की जा रहीं है, जिसके कारण उनके परिवार का भरण पोषण एवं उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहें है, प्रदेश में हजारों की संख्या में अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण विभिन्न विभागों में लंबित चल रहें है, इस संबंध में सभी विभागों द्वारा प्रदेश स्तर पर मानिटरिंग भी की जाती है, किन्तु कोई अंतिम निराकरण नहीं हो रहा है, प्रदेश के प्रत्येक विभाग में प्रति माह कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे है, जिसके कारण पदों का रिक्त होना स्वाभाविक है, किन्तु संबंधित विभाग प्रमुख भी पद रिक्त ना होने का प्रमाण पत्र देकर अपना पल्ला झाड़ लेते है, अनुकंपा नियुक्ति परिवार को मानवीयता की दृष्टि को घ्यान में रखते हुये दी जाती है, किन्तु वर्तमान में इतने नियम लागू कर दिये गये है, जिसकी पूर्ति की जाना पीड़ित परिवार के लिये बहुत ही कठिनाई आ रही है, ऐसे में म.प्र.शासन् को चाहिये कि वह अनुकंपा जैसे शब्द को ध्यान में रखते हुये पीड़ित परिवार को नियमों में शिथिलीकरण करें, जैसे पूर्व में अनुकंपा नियुक्ति के लिये नियमों को शिथिल कर उन्हें तत्काल अनुकंपा नियुक्ति दी जाती थी, किन्तु वर्तमान में ऐसा नहीं हो रहा है, म.प्र. शासन् क्या प्रदेश में लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का निराकरण करेंगी या यू ही इंतजार करते रहेंगे इस पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की गई है अन्यथा की स्थिति में पीड़ित परिवार मजबूर होकर उन्हें आन्दोलन करने के लिये बाध्य होना पड़ेगा।



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