दमोह में सड़क सुरक्षा की खुली पोल: बिना हेलमेट दौड़ती ज़िंदगियाँ, कब होगा प्रशासन जागरूक?
लगातार हो रहीं दुर्घटनाओं से मौत का आंकड़ा बढ़ा, अब तक दो आरक्षक और एक पत्रकार की जान जा चुकी है
दमोह।
दमोह जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर लापरवाही अब जानलेवा साबित हो रही है। बिना हेलमेट, ओवरलोडेड बाइक, नाबालिग चालकों और ट्रैफिक नियमों के खुलेआम उल्लंघन से जिले की सड़कों पर मौत का तांडव जारी है। हाल ही में हुई दुर्घटनाओं में दो पुलिस आरक्षकों और एक मीडिया कर्मी की असमय मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन अब भी जागेगा?
बिना हेलमेट, चार सवार और एक नन्ही जान… ये सिर्फ लापरवाही नहीं, मौत को खुला न्योता है
बस स्टैंड से किल्लाई नाके की ओर जाने वाली सड़कों पर खुलेआम ट्रैफिक नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। बाइक पर तीन से चार लोग सवार, उनमें से एक नन्ही सी जान, और न किसी के सिर पर हेलमेट। यह नजारा आम हो गया है। ऐसा नहीं है कि ये वाहन चौराहों या ट्रैफिक पुलिस की निगरानी से दूर निकलते हैं। लेकिन कार्रवाई के अभाव में नियम तोड़ना आम होता जा रहा है।
ना समझाना काम आया, ना रोक-टोक… अब ज़रूरत है सख्ती की
दमोह की जनमानसिकता यह बन चुकी है कि जब तक प्रशासन सख्ती से न पकड़े, तब तक लोग न तो नियम मानते हैं और न ही दूसरों की जान की परवाह करते हैं। चाहे स्वच्छता हो या ट्रैफिक सुरक्षा, सुधार तब तक नहीं होता जब तक कठोर कार्रवाई न हो।
हेलमेट जरूरी है, पर ज़िम्मेदारी कहाँ है?
जिले में सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण हेलमेट का न पहनना और ओवरलोड वाहन चलाना है। अफसोस की बात यह है कि माता-पिता तक अपने बच्चों को हेलमेट पहनाने के लिए प्रेरित नहीं करते। कई मामलों में जब किसी युवा की मौत होती है, तब परिजन उनकी याद में हेलमेट बांटते हैं। लेकिन क्या यह सतर्कता पहले नहीं दिखाई जा सकती थी?
दमोह के एक जागरूक नागरिक ने स्वयं के खर्च से हेलमेट की उपयोगिता पर फिल्म तक बनाई, लेकिन दुर्भाग्यवश लोगों की सोच अब भी नहीं बदल रही।
बारिश में बढ़ेगा खतरा, अब चाहिए ठोस कदम
मानसून दस्तक दे चुका है और आने वाले दिनों में फिसलन भरी सड़कों पर दुर्घटनाओं का जोखिम और भी बढ़ जाएगा। प्रशासन के लिए यह चेतावनी है कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले सप्ताह और भी जानलेवा हो सकते हैं।
यह हैं संभावित सुझाव जो प्रशासन को तुरंत लागू करने चाहिए:
- हेलमेट पहनना पूर्णत: अनिवार्य किया जाए।
- बाइक पर तीन या अधिक सवारी पर सख्त प्रतिबंध लगे।
- नाबालिग द्वारा वाहन चलाने पर माता-पिता पर जुर्माना लगे।
- कम से कम एक माह तक ज़िलेभर में सतत चेकिंग अभियान चलाया जाए।
- सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान स्कूलों और कॉलेजों में चलाया जाए।
दमोह जैसे छोटे लेकिन विकासशील शहर में, सड़क सुरक्षा अब प्राथमिकता होनी चाहिए, केवल ट्रैफिक नियमों की किताबों में नहीं बल्कि ज़मीनी स्तर पर। प्रशासन, समाज और परिजनों को मिलकर एकजुट होकर यह सुनिश्चित करना होगा कि एक भी जान सिर्फ लापरवाही की वजह से न जाए।



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