शिव महापुराण कथा में विपिन बिहारी महाराज ने दी जीवन जीने की सीख..

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श्री शिव महापुराण कथा में विपिन बिहारी महाराज ने दी जीवन जीने की सीख, गौमाता और संस्कृति संरक्षण का दिया संदेश

हिरनी बहेलिया की कथा और बुंदेली व्यंग्य से झूमे श्रद्धालु

दमोह/ हटा।
रुक्मणी निकेतन हटा में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन बुंदेली शैली के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित श्री विपिन बिहारी जी महाराज ने धर्म, संस्कृति, पारिवारिक मूल्य और आचरण पर गूढ़ विचार प्रस्तुत किए। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

महाराज श्री ने शिव एवं ब्रह्मा द्वारा प्रकट किए गए वृक्षों और बेलपत्र की महत्ता पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि शिव जी को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है और एक बेलपत्र अर्पण करने से कन्यादान के समान पुण्य प्राप्त होता है। भगवान शिव पर जल चढ़ाने की विधियों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

कथा के दौरान उन्होंने कहा, “आजकल लोग विचारों से कमजोर हो गए हैं। कथा सुनते हैं, संकल्प लेते हैं, लेकिन पंडाल से बाहर निकलते ही सब भूल जाते हैं।” उन्होंने सच्चे ब्राह्मण के लक्षण समझाते हुए कहा कि जाति नहीं, कर्म से ब्राह्मणत्व की पहचान होती है।

पारिवारिक कलह और सामाजिक कुरीतियों पर भी महाराज श्री ने तीखे लेकिन हँसाने वाले बुंदेली व्यंग्य के माध्यम से कटाक्ष किए। उन्होंने कहा, “भाई-भाई का झगड़ा, देवरानी-जेठानी का टंटा – सबसे खतरनाक झगड़े होते हैं।”

हिरनी और बहेलिया की कथा सुनाते हुए उन्होंने सच बोलने और झूठी गवाही से बचने की प्रेरणा दी। बोले, “झूठी गवाही देने वाले की पाँचवीं पीढ़ी तक वंश खत्म हो जाता है।”

उन्होंने गौमाता के संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा, “गौ माता का धन खाने वाले का खानदान नष्ट हो जाता है। सरकार 40 रुपये प्रतिदिन दे रही है, यदि ईमानदारी से उसका उपयोग हो तो एक भी गाय सड़कों पर न दिखे।”

आधुनिक व्यवहार और दिखावे पर भी उन्होंने गहरा व्यंग्य किया –
“भोजन, भजन और शयन पर्दे में होना चाहिए। आजकल मंदिर जाने वाले भगवान से नहीं, सेल्फी से मतलब रखते हैं। साधु-संत का चित्र नहीं, चरित्र खींचो। जब चरित्र खींच लिया, तब भगवान अपने आप मिल जाएंगे।”

भाईचारे और पारिवारिक प्रेम की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि “आजकल भाई-भाई एक साथ भोजन नहीं करते, जब ऐसा होने लगेगा तो कोई काल नहीं पड़ेगा। बेटी का जूठा खाने वाला कभी अकाल मृत्यु नहीं मरता।”

शादी समारोह में बढ़ते दिखावे और फोटोशूट पर उन्होंने बुंदेली अंदाज में तीखा व्यंग्य करते हुए श्रद्धालुओं को खूब हँसाया और साथ ही संयम व मर्यादा का संदेश भी दिया।

कथा में सत्संग, भजन एवं संत समागम लगातार जारी है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं और आध्यात्मिक आनंद ले रहे हैं।

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