राज्यमंत्री के पत्र के बाद भी नहीं सुधरी स्कूल की हालत, जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर मासूम बच्चे..
अधिकारियों की लापरवाही और प्रशासन की उदासीनता से गहराया संकट..
दमोह/पथरिया
दमोह जिले के पथरिया ब्लॉक अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला मढ़कोला टपरिया प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का प्रतीक बन चुकी है। करोड़ों रुपये की खनिज न्यास मद (DMFT) से राशि दो विधायकों, दो मंत्रियों और एक सांसद द्वारा स्कूलों के विकास के लिए दी गई थी, लेकिन इस स्कूल की हालत देखकर यह भरोसा करना मुश्किल हो जाता है कि उस धन का कोई प्रभाव यहां पड़ा हो।

विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है, दीवारें दरकी हुई हैं और छत कभी भी गिर सकती है। इन खतरनाक हालातों के बीच नन्हे बच्चे रोज़ जान जोखिम में डालकर पढ़ने आते हैं। स्कूल परिसर में भूसे के ढेर लगे हैं और चारों ओर अतिक्रमण का बोलबाला है, जिससे शिक्षा का माहौल पूरी तरह से नष्ट हो चुका है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पथरिया विधायक एवं राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने 13 नवम्बर 2024 को कलेक्टर दमोह सुधीर कुमार कोचर को पत्र लिखकर भवन की मरम्मत और सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता बताई थी। पत्र में यह स्पष्ट किया गया था कि विद्यालय की हालत न केवल शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित कर रही है, बल्कि छात्रों और शिक्षकों की जान को भी खतरा है।
लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, अब तक प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई है। न तो मरम्मत का कार्य शुरू हुआ है और न ही अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई कदम उठाया गया है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या प्रशासनिक अमले को बच्चों की जान से अधिक अन्य प्राथमिकताएँ हैं?
कलेक्टर कार्यालय, जो अक्सर त्वरित निर्णय और सक्रियता के लिए जाना जाता है, इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह से मौन है, जिससे स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों और पालकों में भी इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
क्या कहते हैं आंकड़े और योजनाएं?
खनिज न्यास निधि (DMFT) से शैक्षणिक संस्थानों के विकास के लिए दमोह जिले में करोड़ों रुपये स्वीकृत हुए हैं। लेकिन यदि जमीनी हालात नहीं बदलते, तो यह धन केवल कागजों पर ही उपयोगी साबित होता रहेगा।
मढ़कोला टपरिया प्राथमिक शाला की दुर्दशा प्रशासनिक उदासीनता और विकास योजनाओं के अमल में लापरवाही की सजीव तस्वीर है। यह आवश्यक हो गया है कि जिम्मेदार अधिकारी तुरंत संज्ञान लें और बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करें – वरना एक बड़ा हादसा कभी भी हो सकता है



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