फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाला: अपर कलेक्टर ने की आपराधिक जांच की सिफारिश, पुलिस अधीक्षक को भेजा पत्र
दमोह।
जिले में फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर प्रकरण पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अपर कलेक्टर मीना मसराम ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की आपराधिक दृष्टिकोण से जांच कराते हुए भारतीय न्याय संहिता 2023 एवं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के तहत दण्डनीय धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है।
पत्र में बताया गया है कि सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय दमोह की रिपोर्ट के अनुसार, तीन जन्म प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं। ये प्रमाण पत्र जिला चिकित्सालय के रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु विभाग की अधिकृत पदमुद्रा से जारी नहीं हुए हैं और न ही पंजीयन रजिस्टर या ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि ये प्रमाण पत्र कैफे के माध्यम से बनाए गए, जो स्पष्ट रूप से 1969 की धारा 12/17 का उल्लंघन है।
प्रकरण तब सामने आया जब 01 जुलाई 2025 की जनसुनवाई में श्री बारेलाल रजक नामक व्यक्ति ने शिकायत करते हुए बताया कि वह अब तक 15 बार आधार कार्ड के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन उसका आवेदन बार-बार निरस्त हो रहा है। इस दौरान उसने तीन जन्म प्रमाण पत्र और तीन आधार पंजीयन रसीदें प्रस्तुत की थीं, जिनकी जांच के बाद योजना एवं सांख्यिकी विभाग ने उन्हें फर्जी घोषित किया।
इस पूरे घटनाक्रम से प्रशासन में हड़कंप मच गया है और फर्जीवाड़े के इस गिरोह की तह तक पहुँचने के लिए अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि इस तरह के और भी फर्जी प्रमाण पत्र बनाए गए होंगे, जिनके ज़रिए कई सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग किया जा सकता है।
अब देखना होगा कि पुलिस इस पूरे मामले में कितनी तत्परता से कार्रवाई करती है और दोषियों को कब तक गिरफ्त में लेती है।



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