हाथीघाट का मुख्य मार्ग बना कीचड़ का दलदल, स्कूली बच्चों से लेकर ग्रामीण तक बेहाल..

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हाथीघाट का मुख्य मार्ग बना कीचड़ का दलदल, स्कूली बच्चों से लेकर ग्रामीण तक बेहाल
बरसात में बिखर गई विकास की हकीकत, सड़क की बदहाली पर फसल बोकर किया विरोध प्रदर्शन

दमोह/तेंदूखेड़ा
दमोह जिले की ग्राम पंचायत हरदुआ अंतर्गत आने वाला गांव हाथीघाट इन दिनों बदहाल सड़क व्यवस्था की मार झेल रहा है। बरसात की शुरुआत के साथ ही गांव का मुख्य मार्ग कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया है। हालत इतनी खराब है कि स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक का आवागमन मुश्किल हो गया है।

गांववासियों की समस्याओं को लेकर कवि चंद्रभान सिंह लोधी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने अनूठा विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कीचड़ से भरे इस मुख्य मार्ग पर फसल बोकर शासन और प्रशासन को संदेश देने का प्रयास किया कि “जब इस रास्ते से निकलना ही मुश्किल है, तो कम से कम इसमें खेती ही कर लेते हैं।”

कवि चंद्रभान सिंह लोधी ने कहा कि –

“आजादी के 75 से अधिक वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी हमारे गांव की सड़क पक्की नहीं बन पाई। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, महिलाएं और बुजुर्ग घर से निकलने में डरते हैं। यह सड़क ही गांव को मुख्य मार्ग, बाजार और स्कूल से जोड़ती है, लेकिन आज यह कीचड़ का दलदल बन चुकी है।”

ग्रामीणों की पीड़ा:

ग्रामीणों का कहना है कि चुनावों के समय नेताओं द्वारा पक्की सड़क का वादा किया गया था, लेकिन वादे हवा हो गए। बारिश में फिसलन के कारण कई बच्चे गिरकर चोटिल हो चुके हैं और दोपहिया वाहन चालकों की जान पर बनी हुई है।

प्रशासन बना मौन:

गांव की इस गंभीर समस्या के बावजूद पंचायत और तहसील प्रशासन अब तक मौन है। ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें दर्ज करवाईं, लेकिन मौके पर न तो कोई जिम्मेदार आया और न ही कोई ठोस कार्यवाही की गई।
इस संबंध में जनपद सीईओ मनीष बागरी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

विरोध प्रदर्शन में शामिल:

इस प्रदर्शन में कवि चंद्रभान सिंह लोधी, भूपेंद्र सिंह लोधी, धन सिंह आदिवासी, रम्मू सिंह, सहित गांव की महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए और सड़क की दुर्दशा को लेकर जमकर रोष जताया।

अब देखना होगा कि जिम्मेदार कब इस ओर ध्यान देते हैं और गांव हाथीघाट को कीचड़ और बदहाली से कब राहत मिलती है। ग्रामीणों की एक ही मांग है — “हम भी सड़क पर चलना चाहते हैं, दलदल में नहीं।”

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