मोहास गांव के ग्रामीणों ने उठाए फावड़े, खुद ही कर दी गांव की सफाई..

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मोहास गांव के ग्रामीणों ने उठाए फावड़े, खुद ही कर दी गांव की सफाई
ग्रामवासियों की मिसाल: जब प्रशासन ने नहीं सुनी तो खुद ही संभाली कमान

कुम्हारी/मझोली (दमोह)।
जहां एक ओर सरकारें गांवों के समग्र विकास के दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर दमोह जिले की मझोली पंचायत के मोहास गांव की सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे मोहास गांव के ग्रामीण अब खुद ही अपने हक के लिए खड़े हो गए हैं।

शनिवार को गांव की गंदगी से परेशान होकर दर्जनों ग्रामीणों ने हाथों में फावड़े उठा लिए और गांव की गलियों व नालियों की सफाई का बीड़ा स्वयं उठाया। लंबे समय से पंचायत और प्रशासन की उपेक्षा झेल रहे इन ग्रामीणों ने अपनी एकजुटता से मिसाल पेश की।

गांव की हालत बेहद खराब है—गली-मोहल्ले कच्चे हैं, नालियों में महीनों से सफाई नहीं हुई, जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच और सचिव से कई बार विकास कार्यों की मांग की गई, लेकिन हर बार आश्वासन देकर टाल दिया गया। जब कहीं से कोई मदद नहीं मिली तो ग्रामीणों ने खुद ही गांव को स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया।

इस श्रमदान ने जहां मोहास गांव को कुछ राहत दी, वहीं ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से चेताया कि आने वाले पंचायत चुनावों में वे इस लापरवाही का करारा जवाब देंगे। गांववासियों का कहना है कि अब वे जागरूक हो चुके हैं और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना जानते हैं।

ग्रामीण बोले — “अब और नहीं सहेंगे उपेक्षा”
गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा तक इस मुहिम में शामिल हुए। ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल सफाई नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ एक शांत लेकिन सशक्त विरोध है। अगर पंचायत और प्रशासन अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाएंगे तो गांव के लोग मिलकर अपना हक खुद हासिल करेंगे।


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