न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल?
वहीं वर्दी फिर बनी जीवनरक्षक
दमोह।
मंगलवार की सुबह दमोह जिला न्यायालय परिसर में एक युवक द्वारा आत्मदाह का प्रयास करने की सनसनीखेज घटना सामने आई। हालांकि समय रहते पुलिस कर्मी की सूझबूझ से युवक की जान बच गई, लेकिन इस घटना ने कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, होशंगाबाद निवासी जतिन चौरे ने न्यायालय परिसर में खुद पर पेट्रोल डालकर और हाथ की नस काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। वह अपने भाई निखिल चौरे के मामले में पैरवी करने के लिए दमोह आया था। निखिल चौरे हिंडोरिया थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 93/25 के तहत 55 लाख रुपये की लोन धोखाधड़ी के मामले में पिछले 8 महीनों से जेल में बंद है।
जतिन ने दावा किया कि उसका भाई निर्दोष है और उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। बार-बार जमानत याचिकाएं खारिज होने और न्याय न मिलने की पीड़ा ने जतिन को इस चरम कदम के लिए मजबूर कर दिया।
वर्दी ने दिखाई फुर्ती, बची जान
घटना के समय न्यायालय परिसर में ज्यादा पुलिस बल मौजूद नहीं था, लेकिन विशेष न्यायालय में तैनात आरक्षक और कोर्ट मुंशी वीरेंद्र गोस्वामी ने तत्परता दिखाते हुए जतिन को आत्मदाह से पहले ही पकड़ लिया और डायल-100 को सूचना देकर तत्काल सहायता बुलाई। समय रहते हुई इस कार्रवाई से युवक की जान बच सकी।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठता है कि जब कोर्ट परिसर एक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, तो वहां कोई व्यक्ति पेट्रोल जैसी ज्वलनशील सामग्री लेकर कैसे पहुंच गया? क्या कोर्ट गेट पर तलाशी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है? अगर आरक्षक वीरेंद्र गोस्वामी समय पर सक्रियता न दिखाते तो एक बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
इस घटना ने जिला प्रशासन और न्यायालय सुरक्षा प्रबंधन को सजग होने की चेतावनी दी है। अब देखना होगा कि इस गंभीर चूक के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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