दमोह में “उद्योग संगम” कार्यशाला सम्पन्न: जिले में औद्योगिक विकास की ओर बड़ा कदम, 200 से अधिक उद्यमियों ने लिया भाग..

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दमोह में “उद्योग संगम” कार्यशाला सम्पन्न: जिले में औद्योगिक विकास की ओर बड़ा कदम, 200 से अधिक उद्यमियों ने लिया भाग..

दमोह
दमोह जिले में औद्योगिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं उद्योग विभाग द्वारा “उद्योग संगम” कार्यशाला का आयोजन पीजी कॉलेज के ऑडिटोरियम में किया गया। इस विशेष कार्यशाला में जिले के 200 से अधिक युवा उद्यमियों, व्यापारियों और स्टार्टअप्स से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख अधिकारी और प्रतिनिधि:
भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे, लघु उद्योग भारती के प्रदेश पदाधिकारी अरुण कुमार सोनी, एमपीआईडीसी के निदेशक आदर्श नायक, एमएसएमई उपसंचालक भोपाल राजेश्वर राव गोरखेड़े, स्टार्टअप सेल हेड आभा ऋषि, सिडबी प्रतिनिधि मनीष कुमार, उद्योग प्रबंधक सागर कमलेश मगरदे समेत कई विशेषज्ञों ने उद्यमियों को दिशा-निर्देश व जानकारी प्रदान की।

कलेक्टर श्री सुधीर कोचर ने कहा कि दमोह के उद्यमियों की लंबे समय से मांग थी कि जिले में उद्योगों के विकास और स्थापना के लिए एक समर्पित मंच हो। “उद्योग संगम” उसी दिशा में पहला प्रयास है। उन्होंने कहा,

> “हम दमोह के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए तेजी से प्रयास करेंगे। स्टार्टअप्स के लिए अलग कैंप, इंडस्ट्रियल पार्क के विकास की योजना और औद्योगिक सर्वे जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं।”

भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे ने कहा कि प्रदेश व केंद्र सरकार निरंतर रोजगार और उद्योगों को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। उन्होंने लघु उद्योग भारती की भूमिका को उद्योग और शासन के बीच सेतु के रूप में बताया।

अरुण कुमार सोनी (लघु उद्योग भारती) ने कहा कि कार्यशाला उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने में आने वाली समस्याओं और उनके समाधान का मंच बनी है।

एमएसएमई उपसंचालक राजेश्वर राव गोरखेड़े ने बताया कि जल्दी ही जिले में औद्योगिक क्षेत्र का सर्वे कराया जाएगा और उद्योग स्थापित करने वाले नवाचारियों व स्टार्टअप्स को ज़मीन भी आवंटित की जाएगी।

स्टार्टअप विशेषज्ञ आभा ऋषि ने बताया कि बेरोजगारी से निपटने के लिए स्टार्टअप्स को एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। स्टार्टअप नीति के तहत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को ₹10,000 प्रति माह तक आर्थिक सहायता दी जा रही है।

MPIDIC निदेशक आदर्श नायक ने बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सरल और प्रभावी बनाने के लिए जनविश्वास अधिनियम लागू किया गया है, जिससे उद्योगपतियों को पूर्व की जटिलताओं से राहत मिलेगी।

ODOP विशेषज्ञ समीर कुशवाहा ने दमोह जिले के उत्पाद — चना व टमाटर को लेकर जानकारी दी और इनके खाद्य प्रसंस्करण व निर्यात को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने बताया कि दमोह से पिछले वर्ष 4 करोड़ का एक्सपोर्ट हुआ है जिसे और बढ़ाया जा सकता है।

सिडबी प्रतिनिधि मनीष कुमार ने ऊर्जा दक्ष मशीनों पर विशेष ब्याज सब्सिडी और फाइनेंसिंग विकल्पों की जानकारी दी।

महाप्रबंधक मंदाकिनी पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2025 को “उद्योग वर्ष” घोषित किया गया है और इस कार्यशाला को उसी श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

स्थानीय उद्यमियों ने क्या कहा:
युवा उद्यमी कणाद खरे ने कार्यशाला को एक “मील का पत्थर” बताया। व्यापारी सेवंती गुजराती ने कहा कि पहली बार इतनी विस्तृत जानकारी एक ही मंच पर मिली, जिससे भविष्य में उन्हें लाभ मिलेगा। उद्योग प्रबंधक कमलेश मगरदे ने इसे शासन और निवेशकों के बीच एक मजबूत कड़ी बताया।

कार्यक्रम का संचालन पं. विपिन चौबे ने किया और आभार सहायक प्रबंधक अशोक शर्मा ने जताया।

दमोह में पहली बार आयोजित यह “उद्योग संगम” कार्यशाला न केवल उद्योगों की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करने में सहायक बनी, बल्कि आने वाले समय में जिले को औद्योगिक नक्शे पर स्थापित करने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध हो सकती है। कार्यशाला में दी गई योजनाओं और सहयोग से न केवल रोजगार सृजित होगा, बल्कि दमोह के आर्थिक विकास को भी नई उड़ान मिलेगी।

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