श्रावणी उपाकर्म: आत्म-शुद्धि और धार्मिक कर्तव्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक — पंडित कुंजीलाल डिम्हा

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श्रावणी उपाकर्म: आत्म-शुद्धि और धार्मिक कर्तव्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक — पंडित कुंजीलाल डिम्हा

बांदकपुर (दमोह) – तीर्थ क्षेत्र श्री देव जागेश्वर नाथ जी मंदिर परिसर में संस्कृत सप्ताह के तृतीय दिवस पर आज विधिवत रूप से श्रावणी उपाकर्म का आयोजन किया गया। मंदिर ट्रस्ट के प्रवक्ता आचार्य पंडित रवि शास्त्री जी महाराज ने बताया कि मंदिर की चौपरा बावड़ी में समस्त विप्रों ने दूध, दही, घी, गोबर और गौमूत्र से निर्मित पंचगव्य का सेवन कर प्रायश्चित किया। इसके बाद देशी गाय के गोबर से बनी राख, मिट्टी, अपामार्ग, कुशा आदि से दस बार स्नान सम्पन्न किया गया।

प्रायश्चित कर्म के उपरांत सभी विप्रजन श्री देव जागेश्वर नाथ जी के रुद्राभिषेक में शामिल हुए। मंदिर परिसर स्थित यज्ञशाला में जनेऊ पूजन, हवन एवं भंडारा भी संपन्न हुआ।

संस्कृत विद्यालय के प्राचार्य पंडित कुंजीलाल डिम्हा ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म, जिसे रक्षा बंधन के नाम से भी जाना जाता है, श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। इसका मुख्य उद्देश्य ब्राह्मणों द्वारा अपने जनेऊ (पवित्र धागा) का परिवर्तन कर धार्मिक कर्तव्यों का पुनः स्मरण करना है। यह पर्व आत्म-शुद्धि, ज्ञान, तप, पूजा-पाठ और दान-पुण्य का प्रतीक माना जाता है।

उन्होंने कहा कि इस दिन ऋषि-मुनियों का पूजन, वेदों का पाठ एवं श्रवण, स्वाध्याय और प्रायश्चित विशेष महत्व रखते हैं। पवित्र कुशा, गौदुग्ध, दही, घी, गोबर और गौमूत्र से स्नान कर वर्षभर में अनजाने में हुए पापों का प्रायश्चित किया जाता है। यह पर्व रक्षा बंधन के रूप में भी मनाया जाता है, जिसमें बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुरक्षा और कल्याण की कामना करती हैं।

कार्यक्रम में मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक पंडित रामकृपाल पाठक, सहायक प्रबंधक पंडित केदारनाथ दुबे, पुजारी पुरोहित महासंघ के जिलाध्यक्ष पंडित अजय गर्ग, दमोह नगर पुरोहित पंडित राजेश पाठक, पंडित कैलाश प्यासी, पंडित विश्वनाथ पाण्डेय, पंडित महेश पाण्डेय, पंडित विकास पाठक, आशीष कृष्ण शास्त्री, सुदर्शन पाठक, राम अवतार शास्त्री, सत्यम मिश्रा, कृष्णकान्त गौतम, ठाकुर प्रसाद शास्त्री सहित बड़ी संख्या में विप्रजन उपस्थित रहे।


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