लव जिहाद के मामलों में पुलिस की शिथिलता फिर उजागर, शिकायतकर्ता परेशान – पटेरा थाने का ताजा मामला
दमोह :दमोह जिले में लव जिहाद के मामलों को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लगातार यह आरोप लगता रहा है कि इस प्रकार के मामलों में पुलिस न तो समय पर एफआईआर दर्ज करती है और न ही शिकायतकर्ताओं को त्वरित न्याय दिलाने का प्रयास करती है। पुलिस की इसी लापरवाही और सुस्त रवैये का ताजा मामला पटेरा थाने से सामने आया है।आरोप – विवाहिता को ब्लैकमेल कर कर रहा था शारीरिक शोषणपटेरा थाना अंतर्गत मुड़ा गांव निवासी राशिद खान नामक युवक पर आरोप है कि वह लव जिहाद के एंगल से एक विवाहिता को लंबे समय से ब्लैकमेल कर रहा था और उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर अपने परिजनों के माध्यम से रविवार को थाना पटेरा में शिकायत दर्ज कराई।
24 घंटे तक सिर्फ आवेदन, एफआईआर से परहेजशिकायत दर्ज होने के बाद उम्मीद थी कि पुलिस तत्काल कार्रवाई करेगी, लेकिन पटेरा थाने की पुलिस ने मात्र आवेदन लिया और एफआईआर दर्ज करने में ढील देती रही। पूरे रविवार और सोमवार बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
हिंदूवादी संगठनों के दबाव के बाद हुई कार्रवाई..
सोमवार की देर रात जब मामला हिंदूवादी संगठनों तक पहुँचा और उन्होंने पुलिस अधिकारियों से फोन पर बात की, तब जाकर पुलिस ने हरकत दिखाई। इसके बाद आरोपी राशिद खान को हिरासत में लिया गया और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
थाना प्रभारी की टालमटोल
इस मामले को लेकर जब मीडिया ने थाना प्रभारी पटेरा से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने कई बार फोन रिसीव नहीं किया। देर रात जब उन्होंने फोन उठाया तो उनका कहना था कि “एफआईआर तो दो घंटे पहले ही दर्ज कर ली गई है”। लेकिन जब विस्तृत जानकारी पूछी गई तो उन्होंने “अभी व्यस्त हैं” कहकर बात टाल दी।
जिलेभर में आम पैटर्न – दबाव के बाद ही कार्रवाई
दमोह जिले में यह पहली घटना नहीं है। आए दिन लव जिहाद से जुड़े मामलों में पुलिस की यही कार्यशैली देखने मिलती है।शिकायतकर्ताओं को 24 से 48 घंटे तक एफआईआर के लिए इंतजार करना पड़ता है।थाने में आवेदन लेने के बाद अक्सर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।जब तक राजनीतिक दबाव या हिंदूवादी संगठनों का हस्तक्षेप न हो, तब तक पुलिस कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाती।कई मामलों में देखा गया है कि रसूखदारों के दबाव में मामले को “ले देकर” निपटा दिया जाता है।लंबित मामले और फरार आरोपीजानकारों के अनुसार, जिले में आज भी ऐसे कई मामले लंबित हैं, जिनमें एफआईआर दर्ज होने के बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ पाई है। वहीं कई मामलों में आरोपी अब तक फरार हैं और पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।बड़े सवाल1. क्या पुलिस प्रशासन केवल दबाव पड़ने के बाद ही कार्रवाई करेगा?2. क्या शिकायतकर्ताओं को न्याय पाने के लिए संगठनों और नेताओं के सहारे रहना पड़ेगा?3. ऐसे मामलों में पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली से समाज में क्या संदेश जा रहा है?



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