चीलघाट के किसानों की पैतृक संपत्ति पर अतिक्रमण का आरोप..

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चीलघाट के किसानों की पैतृक संपत्ति पर अतिक्रमण का आरोप – दमोह कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, सड़क निर्माण को लेकर विवाद गहराया

दमोह/हटा: दमोह जिले की हटा विधानसभा अंतर्गत कुम्हारी पंचायत के ग्राम चीलघाट में किसानों और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के बीच सड़क निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। किसानों का आरोप है कि विभाग उनकी पैतृक कृषि भूमि से जबरन सड़क निकालने की कोशिश कर रहा है, जबकि गांव में पहले से शासकीय भूमि पर कच्चा मार्ग मौजूद है।किसानों को बिना जानकारी थमा दिए नोटिसग्रामीणों ने बताया कि उन्हें अचानक नोटिस मिल गए कि उनकी निजी जमीन से सड़क निकाली जाएगी। सबसे गंभीर आरोप यह है कि किसानों की जानकारी के बिना उनके फर्जी हस्ताक्षर कराए गए और किसी भी किसान से सहमति नहीं ली गई। चीलघाट गांव के लगभग 40–50 किसानों को इस तरह के नोटिस थमाए गए हैं।न सर्वे, न चर्चा – सीधा जमीन पर अतिक्रमणकिसानों का कहना है कि न तो कोई अधिकारी गांव आया, न सर्वे की जानकारी दी गई और न ही उनसे कोई सलाह-मशविरा किया गया। पीडब्ल्यूडी द्वारा चीलघाट से कुम्हारी तक सड़क बनाई जा रही है। पहले यह मार्ग ग्राम की शासकीय भूमि पर कच्ची सड़क के रूप में मौजूद था और ग्रामीण उसी पर आवागमन करते थे।लेकिन अब विभाग शासकीय भूमि छोड़कर किसानों की निजी कृषि भूमि में से सड़क निर्माण कर रहा है। सबसे अधिक प्रभावित छोटे और सीमांत किसान हैं, जिनकी पैतृक जमीन खतरे में आ गई है।कलेक्टर को सौंपा ज्ञापनकिसानों ने इस पूरे प्रकरण को लेकर दमोह कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि सड़क निर्माण का कार्य पूर्व से निर्धारित शासकीय सेर मार्ग पर कराया जाए। साथ ही प्राथमिक शाला चीलघाट से टपरियां, प्राथमिक शाला, आंगनबाड़ी केंद्र और आदिवासी मोहल्ले तक पहुंचने वाला रास्ता भी शासकीय भूमि पर ही बने, जिससे किसी किसान की निजी जमीन प्रभावित न हो।ग्रामीणों की चेतावनी – कार्यवाही न हुई तो होगा चक्का जामग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की और सड़क का निर्माण उनकी निजी कृषि भूमि से जबरन कराया गया तो वे आंदोलन करेंगे और चक्का जाम करने के लिए मजबूर होंगे।प्रशासन के सामने चुनौतीअब देखना होगा कि दमोह कलेक्टर इस मामले में किसानों की शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं। क्या पीडब्ल्यूडी को किसानों की पैतृक संपत्ति बचाने के लिए पुराने शासकीय मार्ग पर ही सड़क निर्माण का निर्देश दिया जाएगा, या फिर किसानों को विरोध और आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

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