खमरिया इस्लामपुरा स्कूल में ‘ईद मुबारक’ स्लोगन पर विवाद..

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खमरिया इस्लामपुरा स्कूल में ‘ईद मुबारक’ स्लोगन पर विवाद, विहिप ने दर्ज की आपत्ति – प्रशासन ने हटवाए धार्मिक चिन्ह, नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार..

दमोह, बटियागढ़।
दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लॉक अंतर्गत खमरिया ग्राम स्थित प्राथमिक सेटेलाइट शाला (जिसे ‘इस्लामपुरा प्राथमिक शाला’ के नाम से जाना जाता है) में दीवार पर लिखे गए ‘ईद मुबारक’ स्लोगन और स्कूल भवन में बने धार्मिक प्रतीक चिन्हों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद ने तब तूल पकड़ा जब विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने स्कूल का भ्रमण कर धार्मिक प्रतीकों और नामकरण पर आपत्ति दर्ज की।

क्या है विवाद का कारण?

विहिप के जिला उपाध्यक्ष बबलू राय और हटा ब्लॉक अध्यक्ष भरत राय ने आरोप लगाया कि:

स्कूल की दीवारों और कक्षों की छतों पर इस्लामिक प्रतीक चिन्ह — जैसे स्टार (सितारे) बने हुए हैं।

दीवारों पर ईद मुबारक जैसे स्लोगन भी लिखे गए हैं।

स्कूल का नाम विभागीय रिकॉर्ड में ‘प्राथमिक शाला इस्लामपुरा’ दर्शाया गया है, जबकि राजस्व अभिलेखों में ‘इस्लामपुरा’ नामक कोई गांव या क्षेत्र नहीं है।

जिस जमीन पर स्कूल बना है, वह आठ्या परिवार द्वारा दान में दी गई थी, और दानपत्र में भी ‘इस्लामपुरा’ का कोई उल्लेख नहीं है।

संगठनों का आरोप है कि यह “नामकरण और प्रतीक चिन्हों के माध्यम से धर्म विशेष के पक्ष में वातावरण बनाने का प्रयास” है, जो शिक्षा विभाग की धार्मिक निष्पक्षता की नीति का उल्लंघन है।

शिक्षकों की सफाई

स्कूल के वर्तमान प्रधानाध्यापक चरणदास पटेल और सहायक शिक्षक एमएल अहिरवार ने स्पष्ट किया कि:

> “हमारी नियुक्ति इस स्कूल में दो वर्ष पहले हुई थी। ईद मुबारक जैसे स्लोगन पहले से ही दीवारों पर लिखे हुए थे। हमने कभी जानबूझकर कोई धार्मिक चिन्ह नहीं बनवाए, और न ही धार्मिक शिक्षा दी जाती है।”



छात्रों और ग्रामवासियों ने भी अधिकारियों से चर्चा में कहा कि विद्यालय में सभी वर्गों के बच्चे मिलजुल कर पढ़ते हैं और किसी प्रकार का धार्मिक टकराव नहीं है।

प्रशासन की कार्रवाई

विवाद की गंभीरता को देखते हुए बटियागढ़ तहसीलदार योगेंद्र चौधरी और जनशिक्षक रोसरा स्कूल पहुंचे और मौके पर जांच की। जांच में सामने आया कि:

‘इस्लामपुरा’ नाम केवल शिक्षा विभाग के पोर्टल और डाइस कोड में दर्ज है, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में इस नाम का कोई उल्लेख नहीं है।

धार्मिक स्लोगन और चिन्ह विद्यालय की दीवारों पर मौजूद थे, लेकिन छात्रों द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया कि धर्म विशेष की शिक्षा नहीं दी जाती।

नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार

मौके पर ही एक पंचनामा तैयार किया गया, जिसमें विद्यालय का नाम ‘स्व. बहादुर सिंह चौहान प्राथमिक शाला भाग 2 खमरिया’ रखने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस पर ग्रामवासियों माधव सिंह, बलराम सिंह, नत्थू सिंह सहित स्कूल स्टाफ ने भी सहमति जताई।

धार्मिक चिन्ह हटाने के निर्देश

प्रशासन ने मौके पर ही स्कूल की दीवारों पर बने धार्मिक प्रतीकों को हटाने और शैक्षणिक सामग्री से संबंधित चित्र व स्लोगन लिखवाने के निर्देश भी दिए।

विहिप की मांग

विहिप के पदाधिकारियों ने इस पूरे मामले की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि शिक्षा के मंदिरों को धार्मिक प्रचार का अड्डा नहीं बनने दिया जा सकता है।

गांव की सामाजिक संरचना

ग्राम खमरिया की आबादी लगभग 2000 है, जिसमें 60-70 मुस्लिम परिवार ‘इस्लामपुरा’ नामक बस्ती में निवास करते हैं। विद्यालय में वर्तमान में 20 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जो सभी जातियों और वर्गों से आते हैं।

डीपीसी का बयान

जिला परियोजना समन्वयक (DPC) मुकेश द्विवेदी ने बताया:

> “स्कूल से धार्मिक स्लोगन हटाए जा चुके हैं। मामले की जांच के लिए टीम भेज दी गई है। दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

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