दमोह। जिले के होनहार विवेकानंद कालोनी निवासी जिन्होंने एम.पी.पीएससी. की परीक्षा में उनका चयन संचालक लोक शिक्षण संस्था में चयन हुआ था और वह वर्तमान में भोपाल में पदस्थ है। उसी तारतम्य में उन्होंने अथक मेहनत करते हुए एम.पी.पीएससी. 2024 की परीक्षा में 5वीं रैक प्राप्त करते हुए उनका चयन उप पुलिस अधीक्षक पद पर हुआ है वह अपनी सफलता का श्रेय माता पिता एवं चाचा को देते है गौरतलव है कि उनके दादा सेवानिवृत्त एवं डी.ओ. वन विभाग में और पिता आदिम जाति कल्याण विभाग में पदस्थ है साथ ही समय समय पर मार्गदर्शन करने वाले उनके चाचा के.के. वर्मा पूंर्व शासकीय अधिवक्ता एवं कांग्रेस नेता है उनकी इस सफलता पर मानक पटेल अध्यक्ष जिला कांग्रेस, अजय टंडन पूर्व विधायक, रतनचंद जैन, मनु मिश्रा, पंकज खरे, अनुनय श्रीवास्तव, मुकेश जैन, मंटु राजकुंमार सोनी, प्रफुल्ल श्रीवास्वत, राशु चौहान, अमर राजपूत, मिक्की चंदेल, अनिल खरे सहित नगर के सभी वर्गो के प्रतिष्ठतो ने बधाई दी है।
दमोह जिले के युवा का कमाल: गांव के विद्युत सिंघई ने बनाया वायु प्रदूषण की भविष्यवाणी करने वाला एआई मॉडल..
बांसा तारखेडा के नवाचार ने दिलाया दमोह को गौरव..
दमोह। टेक्नोलॉजी की दुनिया में दमोह जिले के एक छोटे से गांव बांसा तारखेडा के युवा विद्युत सिंघई ने कमाल कर दिखाया है। उन्होंने एक ऐसा अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल विकसित किया है जो आने वाले 30 दिनों तक वायु प्रदूषण के स्तर की सटीक भविष्यवाणी कर सकता है। उनके इस नवाचार ने न सिर्फ दमोह, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है।

आज के समय में वायु प्रदूषण, विशेषकर PM 2.5 जैसे सूक्ष्म कण, मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए विद्युत सिंघई ने एआई, मशीन लर्निंग (ML) और डीप लर्निंग (DL) तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए 4 मशीन लर्निंग और 2 डीप लर्निंग मॉडल विकसित किए हैं।
उनका यह मॉडल पिछले 5 वर्षों के पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के डेटा पर आधारित है और फिलहाल दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए परीक्षण किया गया है। परिणाम चौंकाने वाले हैं—मॉडल की भविष्यवाणी क्षमता 90% से 98% तक सटीक पाई गई है।दमोह से दिल्ली तक का सफरविद्युत सिंघई वर्तमान में इंदौर में एक सॉफ्टवेयर कंपनी और आईटी संस्थान चला रहे हैं। वे एमसीए डिग्री धारक, आईटी शिक्षक, और पीएचडी शोधकर्ता हैं। उन्होंने तकनीकी विषयों पर कई किताबें लिखी हैं और उनके शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं।
उनके शोध का मकसद सिर्फ टेक्नोलॉजी में प्रगति नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय सुधार को भी दिशा देना है।इंदौर, दमोह और अन्य शहर भी होंगे शामिलविद्युत का उद्देश्य सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। वे जल्द ही इंदौर, दमोह और अन्य शहरों के लिए भी यह मॉडल तैयार करना चाहते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों को वायु गुणवत्ता की जानकारी समय पर मिल सके। इससे लोग पहले से सतर्क होकर मास्क, बाहर जाने से परहेज़, और अन्य सुरक्षात्मक उपाय अपना सकेंगे।
गांव से उठी उम्मीद की किरणगांव के एक साधारण परिवार से आने वाले विद्युत सिंघई ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। उनका यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और स्वच्छ पर्यावरण देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।



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