धार्मिक आस्था, प्रकृति संरक्षण और गौसेवा का अद्भुत संगम..
पूज्य श्री रसराज महाराज जी का श्री जागेश्वरनाथ धाम एवं धेनुवन (गोवर्धन पर्वत) पर हुआ भव्य स्वागत..
बांदकपुर।श्रीधाम वृंदावन से पधारे पूज्य श्री रसराज महाराज जी का आज श्री जागेश्वरनाथ धाम में श्रद्धा और भक्ति से भरा भव्य स्वागत किया गया। धाम पहुँचते ही पूज्य महाराज जी ने भगवान श्री जागेश्वरनाथ जी का पंचामृत अभिषेक कर विधिवत पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात मंदिर परिसर स्थित समस्त मंदिरों के दर्शन कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया।

मंदिर सभागार में संस्कृत वेदांग विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा स्वस्तिवाचन के माध्यम से महाराज जी का स्वागत किया गया। इस अवसर पर मंदिर प्रबंधक श्री रामकृपाल पाठक जी, सहायक प्रबंधक केदारनाथ दुबे जी एवं कुंजीलाल डिम्हा जी द्वारा श्रीफल, शाल एवं श्री जागेश्वरनाथ जी का चित्र भेंट कर पूज्य महाराज जी का अभिनंदन किया गया।

धेनुवन (गोवर्धन पर्वत) पर पूज्य महाराज जी का आगमनधाम दर्शन के उपरांत महाराज जी का पावन आगमन धेनुवन (श्री गोवर्धन पर्वत) पर हुआ। यहाँ सबसे पहले उन्होंने पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। तत्पश्चात पीपल के एक पवित्र वृक्ष की स्थापना की और पर्वत पर स्थित गौवंश की पूजा-अर्चना कर उन्हें प्रसाद स्वरूप भोग अर्पित किया।इस भावपूर्ण क्षण में उपस्थित श्रद्धालु भक्तगण भावविभोर हो उठे और संपूर्ण धेनुवन क्षेत्र “गौमाता की जय” तथा “जागेश्वरनाथ जी की जय” के जयघोष से गूंज उठा।

पूज्य महाराज जी ने इस अवसर पर सभी को गौसंरक्षण, वृक्षारोपण तथा गोवर्धन पर्वत के संरक्षण हेतु प्रेरित किया।पर्यावरण संरक्षण का आदर्श केंद्र बना धेनुवनमंदिर प्रबंधक श्री रामकृपाल पाठक जी ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्य महाराज जी के आगमन से सभी श्रद्धालु अत्यंत आनंदित हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री सुभाष सोलंकी जी के नेतृत्व में गोवर्धन पर्वत क्षेत्र में निरंतर वृक्षारोपण, गौसेवा, एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का कार्य चल रहा है, जिसे पूज्य महाराज जी ने अत्यंत सराहनीय बताया।

धेनुवन क्षेत्र, भगवान श्री जागेश्वरनाथ जी की विशेष कृपा से संरक्षित, एक आदर्श गौ-आधारित पर्यावरण संरक्षण केंद्र बन चुका है। यहाँ हजारों वृक्षों का रोपण किया गया है, जिनका संवर्धन पूर्णतः गौ आधारित पद्धति से किया जा रहा है। गोबर से बनी जैविक खाद और गौमूत्र से तैयार प्राकृतिक कीटनाशकों के उपयोग से पौधों को पोषण और सुरक्षा प्रदान की जा रही है। यही कारण है कि यहाँ के वृक्ष कम जल एवं अधिक तापमान में भी तेजी से विकसित हो रहे हैं।धर्म और विज्ञान का समन्वयधार्मिक मान्यता के अनुसार गौमाता समस्त देवताओं का निवास स्थान हैं और वृक्ष जीवनदायिनी शक्ति के प्रतीक हैं।

जब इन दोनों का संरक्षण एक साथ होता है, तो यह केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी एक वरदान सिद्ध होता है।वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गौवंश और वृक्षों के बीच गहरा संबंध है। गाय से प्राप्त उत्पाद जहां भूमि की उर्वरता और पौधों की रक्षा करते हैं, वहीं वृक्ष वायुमंडल को शुद्ध कर जीवों को स्वस्थ जीवन प्रदान करते हैं।



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